जालंधर ब्रीज: मंदिर के जनरल सेक्टरी राजेश शर्मा ने बताया कि पृथ्वी देवी अब राक्षसों द्वारा किए गए पापों का बोझ नहीं उठा सकती थी। इसलिए वह ब्रह्मा के पास आई और उन्हें राक्षसों द्वारा किए गए पापों के बोझ को सहन करने में अपनी असमर्थता के बारे में बताते हुए उनसे रक्षा के लिए प्रार्थना की। ब्रह्मा ने उससे कहा कि वे सभी देवताओं के साथ ‘क्षीर सागर’ में भगवान विष्णु के पास जायेंगे। और सब ने वहाँ जाकर भगवान् से प्रार्थना की। इस जगत में प्रकट होने की भगवान की इच्छा हुई। तब उन्होंने श्रीमती राधारानी को पहले इस संसार में अवतरित होने के लिए कहा, किन्तु उन्होंने कहा, ” जहाँ यमुना और गोवर्धन नहीं हैं, ऐसे स्थान पर मेरी जाने की इच्छा नहीं है।” उनकी बात सुनकर, भगवान कृष्ण ने अपने 84 कोस के अप्राकृत गोलोक धाम को इस संसार में अवतरित किया, किन्तु गोवर्धन को शाल्मली-द्वीप नामक स्थान पर द्रोण पर्वत के पुत्र के रूप में प्रकट किया।
गिरिराज धरण मैं तो तेरी शरण, श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहयो, गोविंद हरे गोपाल हरे जय जय प्रभु दीनदयाल हरे व हरे कृष्ण महामंत्र संकीर्तन में सभी भाव विभोर हो गए ।
टी एल गुप्ता, नरिंदर गुप्ता, रेवती रमन गुप्ता, अजीत तलवार, कपिल देव शर्मा, राजकुमार जिंदल, चंद्रमोहन राय, केशव अग्रवाल, राजीव ढींगरा, अजय अग्रवाल, सुमित गौतम, राजेश धमीजा, ओम भंडारी, अश्विनी मिंटा, हेमंत थापर, करण वीर, सत्यव्रत गुप्ता, सन्नी दुआ, राजन गुप्ता, यश गुप्ता, प्रेम चोपड़ा, ललित अरोड़ा, नीरज कोहली, ललित चड्डा, गुलशन, गुरविंदर, मानव गुप्ता, तापस गुप्ता, जगन्नाथ शर्मा, रमन अरोड़ा, घनशाम राय, नरेंद्र कालिया, कृष्ण गोपाल, पुरुषोत्तम, यंकिल, अनुभव, व अन्य मौजूद थे |


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