July 19, 2026

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पद्मश्री प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय ने चिकित्सा, समाजसेवा और साहित्य के क्षेत्र में स्थापित की विश्वस्तरीय पहचान

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जालंधर ब्रीज: पद्मश्री से सम्मानित प्रो. डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह संजय देश के अग्रणी ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जनों में गिने जाते हैं। वे एक समर्पित समाजसेवी, लेखक, कवि और प्रेरक वक्ता भी हैं। अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से उन्होंने ट्रॉमा, बोन ट्यूमर, पोलियो, सेरेब्रल पाल्सी तथा रीढ़ की जटिल बीमारियों से पीड़ित हजारों मरीजों को नया जीवन प्रदान किया है।

वर्तमान में प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गुवाहाटी के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एम्स गुवाहाटी में पब्लिक हेल्थ अवेयरनेस एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना एवं संचालन की पहल की है, जिसके दूरगामी एवं सकारात्मक परिणामों की व्यापक अपेक्षा की जा रही है। उनका जन्म 31 अगस्त 1956 को बुंदेलखंड के एक ग्रामीण क्षेत्र में हुआ। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कीं।

उन्होंने वर्ष 1980 में जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर से एमबीबीएस तथा वर्ष 1983 में पीजीआई, चंडीगढ़ से ऑर्थोपेडिक्स में उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद स्वीडन, जापान, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और रूस सहित अनेक देशों के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप प्राप्त की।

डॉ. संजय ने भारत और विदेशों के अनेक प्रमुख अस्पतालों एवं चिकित्सा संस्थानों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में 150 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा उनके शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं। उन्हें जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, अमेरिका, मलेशिया सहित अनेक देशों के विश्वविद्यालयों एवं अस्पतालों में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया। अब तक वे 50 से अधिक देशों में चिकित्सा, शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर अपने ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान कर चुके हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में उन्होंने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने 35 वर्षीय मरीज की जांघ की हड्डी से 16.5 किलोग्राम का विशाल बोन ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला। वर्ष 2023 में लंदन स्थित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने उन्हें “23 चेंज मेकर ऑफ द वर्ल्ड 2023” में शामिल किया तथा इसका सम्मान-पत्र उन्हें लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड, लंदन में प्रदान किया गया। उनका नाम कई बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।

उनकी प्रमुख शल्य चिकित्सा उपलब्धियों में 98 वर्षीय उच्च जोखिम वाले मरीज की सफल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी, बोन कैंसर से पीड़ित किशोरी के अंग को बचाने के लिए ट्यूमरयुक्त हड्डी का पुनः प्रत्यारोपण तथा 88 वर्षीय मरीज की सफल स्पाइन सर्जरी शामिल हैं।

अपने चार दशक से अधिक लंबे चिकित्सा जीवन में डॉ. संजय ने पोलियो और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के हजारों ऑपरेशन किए हैं। उन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में 300 से अधिक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को कम करने के लिए वे वर्ष 2001 से निरंतर सड़क सुरक्षा जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। आकाशवाणी, दूरदर्शन, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक मंचों के माध्यम से उन्होंने लाखों लोगों को यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया है। 30 अप्रैल 2025 को उन्होंने उत्तराखंड राजभवन में सड़क सुरक्षा जन-जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया। उनकी पुस्तक “भारत में सड़क दुर्घटनाएं” का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा किया गया। पूर्वोत्तर भारत में भी उन्होंने आईआईटी, एनआईटी, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य प्रमुख शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों में सड़क सुरक्षा पर व्याख्यान देकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान को नई दिशा प्रदान की है।
पूर्वोत्तर भारत में भी उन्होंने सड़क सुरक्षा जन-जागरूकता अभियान को नई दिशा प्रदान की। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा सहित विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों के आईआईटी, एनआईटी, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान देकर उन्होंने हजारों युवाओं और विद्यार्थियों को यातायात नियमों के पालन तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।

डॉ. संजय प्रत्येक शनिवार को बीपीएल कार्डधारकों को निःशुल्क ऑर्थोपेडिक परामर्श प्रदान करते हैं। वे गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क चिकित्सा परामर्श, स्वास्थ्य शिविर तथा सर्जरी की व्यवस्था भी करते रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वे स्वास्थ्य विषयों पर एक निःशुल्क मासिक स्वास्थ्य पत्र का भी वितरण कर रहे हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने लेखों, रेडियो एवं टेलीविजन कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाया। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें कोरोना वॉरियर्स अवॉर्ड-2020, अनस्टॉपेबल कोविड-19 फाइटर सम्मान, सेवा रत्न सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

एक सफल चिकित्सक होने के साथ-साथ डॉ. संजय संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। उनकी पहली काव्य कृति “उपहार संदेश का” भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित की गई, जिसका विमोचन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें हिंदी भवन, नई दिल्ली में ‘काव्य भूषण’ सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे विषयों पर सौ से अधिक अतिथि लेख लिखे हैं। इन लेखों का संकलन “फ्रॉम द पेन ऑफ सर्जन्स” नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ, जिसका विमोचन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया।

उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए 9 नवंबर 2021 को राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें सीकोट फाउंडेशन पुरस्कार, आजीवन उपलब्धि पुरस्कार, उत्तराखंड रत्न, उत्तरांचल गौरव, विशिष्ट ऑर्थोपेडिक सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वे अपनी उत्कृष्ट वक्तृत्व क्षमता के लिए प्रोफेसर एस. सी. गौर ओरेशन, प्रोफेसर एम. मुखोपाध्याय ओरेशन तथा प्रोफेसर टी. पी. श्रीवास्तव ओरेशन से सम्मानित किए जा चुके हैं।

वर्तमान में वे स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगर निगम देहरादून के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर भी रहे हैं तथा आत्मनिर्भर भारत, जनस्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों में प्रेरक वक्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय का व्यक्तित्व चिकित्सा, शिक्षा, समाजसेवा, जनस्वास्थ्य और साहित्य का अद्भुत संगम है। उन्होंने अपने ज्ञान, सेवा, मानवीय संवेदनाओं और उत्कृष्ट नेतृत्व के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनका जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प, उत्कृष्टता और निस्वार्थ सेवा के बल पर समाज में स्थायी एवं सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनकी उपलब्धियां वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत हैं।

प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय का जीवन चिकित्सा, शिक्षा, जनस्वास्थ्य, साहित्य और समाजसेवा का प्रेरणादायक संगम है। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि ज्ञान, सेवा और समर्पण के माध्यम से समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।


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