जालंधर ब्रीज: बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सिविल सर्जन डॉ. गुरमीत लाल की अध्यक्षता में, सिविल सर्जन कार्यालय जालंधर में ए.ई.एफ.आई. (Adverse Events Following Immunization) अर्थात् टीकाकरण के बाद होने वाले प्रभाव संबंधी बैठक आयोजित की गई।
बैठक के दौरान समीक्षा करते हुए डॉ. गुरमीत लाल ने कहा कि टीकाकरण अभियान हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। जब भी कोई बच्चा टीकाकरण सत्र/ममता दिवस पर टीका लगवाने आता है, तो आशा वर्कर/ए.एन.एम. द्वारा बच्चे की मां या रिश्तेदार को चार संदेश जरूर बताए जाएं —
बच्चे को कौन-सा टीका दिया गया और यह किस बीमारी से बचाता है। अगला टीकाकरण कब और कहां होगा। कौन-कौन से प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं और उनका इलाज कैसे करें। टीकाकरण कार्ड को सुरक्षित रखें और अगली बार साथ लाएं।
इससे बच्चे की मां को यह जानकारी होगी कि उसके बच्चे को कौन-सी वैक्सीन दी गई है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. राकेश चोपड़ा ने बताया कि कभी-कभी टीकाकरण के बाद बच्चे को बुखार, उल्टी, दस्त या अन्य कोई परेशानी हो सकती है। ऐसे में आम लोगों में यह गलतफहमी हो जाती है कि यह समस्या टीके के कारण हुई है, जबकि इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है, क्योंकि अन्य बच्चों को भी वही वैक्सीन दी जाती है। यदि फिर भी किसी बच्चे को समस्या होती है, तो तुरंत आशा/ए.एन.एम./बाल रोग विशेषज्ञ मेडिकल अधिकारी से संपर्क करें और सरकारी अस्पताल की सेवाएं लें। उन्होंने कहा कि बच्चों का टीकाकरण 100 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. नांगल, जिला बी.सी.जी. अधिकारी डॉ. चश्म मित्रा, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शोभना बंसल, डॉ. ऋषि मार्कंडा (पीडियाट्रिशियन), डॉ. नवनीत दिओल (पैथोलॉजिस्ट), मेडिकल ऑफिसर डॉ. मानव मिड्डा, जिला सामूहिक शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गुरदीप सिंह और अर्बन सिटी प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. सुरभि मौजूद रहे।

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