July 8, 2026

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‘सतलुज’ फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने में भाजपा की कोई भूमिका नहीं; लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक : सरदार रवनीत सिंह

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जालंधर ब्रीज: रेल मंत्रालय तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री सरदार रवनीत सिंह ने आज स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा ‘सतलुज’ फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अथवा केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने के प्रयास पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं।

आज जालंधर में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है। फिल्म में जिन घटनाओं को दर्शाया गया है, वे उस समय की हैं जब पंजाब में भी कांग्रेस की सरकार थी और केंद्र में भी कांग्रेस का शासन था। ऐसे में उस दौर से जुड़े घटनाक्रम अथवा फिल्म के प्रस्तुतीकरण को भारतीय जनता पार्टी से जोड़ना पूरी तरह राजनीतिक प्रेरित और तथ्यहीन है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से संबंधित कानूनी व्यवस्था को समझना भी आवश्यक है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की तरह पूर्व सेंसरशिप (Pre-Censorship) के अधीन नहीं होती। किसी फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी रखना, हटाना अथवा उपलब्ध कराना संबंधित प्लेटफॉर्म का संपादकीय, कानूनी एवं व्यावसायिक निर्णय होता है। फिल्मों के लिए सरकारी प्रमाणन एवं नियामक प्रावधान मुख्य रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों पर लागू होते हैं, जबकि सैटेलाइट एवं केबल टेलीविजन प्रसारण अलग-अलग वैधानिक एवं नियामक प्रावधानों के अंतर्गत संचालित होते हैं। इसलिए ‘सतलुज’ फिल्म को ZEE5 से हटाए जाने के लिए भाजपा या केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने का कोई कानूनी अथवा तथ्यात्मक आधार नहीं है।

केंद्रीय राज्य मंत्री सरदार रवनीत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी फिल्म को दबाना या उस पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब का इतिहास एकतरफा दृष्टिकोण के बजाय संपूर्ण परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने लगातार यह कहा है कि आतंकवाद के दौर पर होने वाली किसी भी चर्चा में केवल राज्य के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की ही नहीं, बल्कि उन हजारों निर्दोष नागरिकों, पुलिस कर्मियों, सरकारी कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और सामान्य परिवारों की पीड़ा एवं बलिदान को भी समान रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए, जिन्होंने आतंकवाद की हिंसा झेली।

उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और किसी भी प्रकार की हिंसा का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए तथा इसे किसी धर्म या समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास का मूल्यांकन तथ्यों, प्रमाणित अभिलेखों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर होना चाहिए, न कि चुनिंदा कथनों या राजनीतिक प्रचार के आधार पर।

उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला था जब पंजाब वर्षों के आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित था। उस सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी शांति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना थी। पंजाब में सामान्य स्थिति की वापसी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का पुनर्जीवन और जनता के विश्वास की बहाली भी उस दौर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे समान महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि लोकतांत्रिक समाज में इतिहास पर चर्चा अवश्य होनी चाहिए, लेकिन ऐसी चर्चा तथ्यों, प्रमाणों और संतुलित ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर आधारित होनी चाहिए, न कि भ्रामक सूचनाओं अथवा राजनीतिक विवाद उत्पन्न करने के प्रयासों पर। पंजाब का भविष्य शांति, लोकतंत्र, विकास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सद्भाव पर आधारित होना चाहिए, न कि पुराने घावों को राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार कुरेदने पर।

उन्होंने कहा कि ‘सतलुज’ फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के लिए भाजपा या केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने वाले सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और इन्हें जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से किया गया राजनीतिक दुष्प्रचार माना जाना चाहिए।


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