जालंधर ब्रीज: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सदस्य सचिव एवं आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को एचएसपीसीबी के सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में संचालित खाते से सरकारी धन के गबन के मामले में गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि सदस्य सचिव के रूप में प्रदीप कुमार की भूमिका इस धोखाधड़ी से सीधे तौर पर जुड़ी हुई थी। उन्होंने निवेश संबंधी समस्त कार्य अपने स्तर पर स्वयं संभाला। सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) के लिए निर्धारित सीमा से कहीं अधिक राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भेजी गई। फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर एचएसपीसीबी की धनराशि पहले सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए एक खाते में स्थानांतरित की गई। आश्चर्यजनक रूप से विभाग इस खाते के खोले जाने से संबंधित कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका।
षड्यंत्र इतना गहरा था कि आवश्यक अनुमोदनों के बिना ही यह खाता खोल दिया गया और फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर उसमें सरकारी धन स्थानांतरित कर दिया गया। अब तक की जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस बैंक में कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाया ही नहीं गया। इसके बजाय इस खाते से धोखाधड़ीपूर्ण डेबिट लेन-देन किए गए, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी धन का गबन हुआ और हरियाणा सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपये का शुद्ध वित्तीय नुकसान हुआ। यह पूरे घोटाले में प्रभावित सरकारी विभागों में से किसी एक विभाग को हुआ सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान है।
प्रदीप कुमार काफी समय से जांच से बचने का प्रयास कर रहे थे और बार-बार प्रयास किए जाने के बावजूद जांच में शामिल नहीं हो रहे थे। सीबीआई ने उनके ठिकाने का सफलतापूर्वक पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) से अपने हाथ में ली थी। एचएसपीसीबी से संबंधित यह धोखाधड़ी सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में हुए एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये कथित रूप से फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट तथा धोखाधड़ीपूर्ण डेबिट लेन-देन के माध्यम से हड़प लिए गए और बाद में शेल कंपनियों के जरिए धन का प्रवाह किया गया।
अब तक सीबीआई ने हरियाणा मामले में 17 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोक सेवक, दो कंपनियां तथा छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। वर्तमान गिरफ्तारी से पहले सीबीआई इस मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच भी अपने हाथ में ली है। इनमें एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल)/नगर निगम, चंडीगढ़ तथा दूसरा चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) से संबंधित है। दोनों मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
सीएससीएल मामले में सीबीआई ने पांच बैंक अधिकारियों, सीएससीएल के एक अधिकारी तथा एक निजी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया है। वहीं, क्रेस्ट मामले में पांच बैंक अधिकारियों, क्रेस्ट के दो अधिकारियों, चार निजी व्यक्तियों और दो कंपनियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। इस मामले में भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई सभी दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने, गबन किए गए सार्वजनिक धन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने तथा अपराध से अर्जित संपत्तियों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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