June 21, 2026

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महिला क्रिकेट के सशक्तिकरण की दिशा में बीसीसीआई का एक ऐतिहासिक कदम

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जालंधर ब्रीज: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा घरेलू महिला क्रिकेटरों की मैच फीस में की गई हालिया वृद्धि केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक दूरदर्शी कदम है। अब सीनियर महिला क्रिकेटरों की प्रतिदिन मैच फीस 20,000 से बढ़ाकर 50,000 कर दी गई है, जबकि रिज़र्व खिलाड़ियों के लिए यह राशि 10,000 से बढ़ाकर 25,000 कर दी गई है। टी20 मैचों में सीनियर प्लेइंग 11 को 25,000 और रिज़र्व खिलाड़ियों को 12,500 प्रतिदिन मिलेगा। जूनियर महिला टूर्नामेंट्स में प्लेइंग 11 को 25,000 और रिज़र्व खिलाड़ियों को 12,500 प्रतिदिन मिलेगा, जबकि टी20 मैचों में प्लेइंग 11 के लिए 12,500 और रिज़र्व खिलाड़ियों के लिए 6,250 निर्धारित किया गया है। यह नई संरचना न केवल महिला क्रिकेटरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि घरेलू स्तरीय महिला क्रिकेट की पूरी प्रणाली को और अधिक मजबूत, पेशेवर और स्थिर बनाती है, जिससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और युवा प्रतिभाओं को खेल में आने तथा उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

घरेलू क्रिकेट ही किसी राष्ट्र की क्रिकेट संरचना की रीढ़ है। जब तक घरेलू स्तर पर खिलाड़ियों को उचित आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक उनकी प्रतिभा का सतत विकास संभव नहीं है। महिला क्रिकेटरों की मैच फीस में यह ऐतिहासिक वृद्धि न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, बल्कि युवा लड़कियों के लिए भी यह संदेश देगी कि क्रिकेट अब एक सम्मानजनक और व्यवहारिक करियर विकल्प बन चुका है।

महिला क्रिकेट के इस समग्र विकास में बीसीसीआई के पूर्व सचिव और वर्तमान आईसीसी अध्यक्ष जय शाह की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनके कार्यकाल में महिला क्रिकेट को जिस तरह मुख्यधारा में लाने के प्रयास हुए, वे ऐतिहासिक हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला और पुरुष क्रिकेटरों की मैच फीस में समानता, महिला प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को मजबूत करना और अब घरेलू क्रिकेट में आर्थिक सुधार, ये सभी कदम एक स्पष्ट सोच और दीर्घकालिक दृष्टि का परिणाम हैं।

जय शाह ने हमेशा यह माना कि महिला क्रिकेट का विकास केवल बराबरी की बात नहीं है, बल्कि समान अवसर, संसाधन और सम्मान देने की प्रक्रिया है। उनके नेतृत्व में महिला क्रिकेट को वह मंच और संरचना मिली, जिसकी लंबे समय से आवश्यकता थी।

आज भारतीय महिला क्रिकेट जिस आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है, उसके पीछे यही निरंतर और सशक्त नीतिगत निर्णय हैं। बीसीसीआई का यह ताज़ा फैसला निश्चय ही आने वाले वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट को और अधिक मज़बूत बनाएगा और खेल के माध्यम से समाज में लैंगिक समानता का संदेश भी देगा।

मुझे विश्वास है कि यह कदम केवल एक शुरुआत है और भविष्य में महिला क्रिकेट को लेकर और भी सकारात्मक एवं क्रांतिकारी निर्णय देखने को मिलेंगे।

डॉ. सी. के. खन्ना की कलम से
(पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, बीसीसीआई)


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