जालंधर ब्रीज: देहरादून! एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष, पद्मश्री से सम्मानित प्रो. डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह संजय ने 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक जापान की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा, हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और विश्व शांति से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया।
यात्रा का प्रमुख उद्देश्य क्योटो में 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक आयोजित 46वें SICOT ऑर्थोपेडिक वर्ल्ड कांग्रेस में भाग लेना था। सम्मेलन में डॉ. संजय ने हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ साझा किए।

7 अक्टूबर को डॉ. संजय ने जापान में भारत की माननीय राजदूत श्रीमती नगमा मोहम्मद मलिक से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राजदूत को अपनी पुस्तकें उपहार संदेश का और भारत में सड़क दुर्घटनाएँ भेंट कीं। दोनों के बीच भारत-जापान संबंधों तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच संकाय आदान-प्रदान की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जापान प्रवास के दौरान उन्होंने ओसाका में पद्मश्री से सम्मानित प्रो. तोमियो मिजोकामि से मुलाकात की। टोक्यो में दायितो बुंका विश्वविद्यालय के प्रो. हिदेआकी इशिदा, सेवानिवृत्त प्रो. इंद्राणी भट्ट तथा टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. क्योसुके आदाची एवं विजिटिंग प्रोफेसर ऋषिकेश मिश्रा से भी भेंट की। इन मुलाकातों में हिंदी भाषा, भारतीय साहित्य, संस्कृति और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रो. डॉ. संजय ने संबंधित विद्वानों और विश्वविद्यालय को अपनी पुस्तकें उपहार संदेश का तथा भारत में सड़क दुर्घटनाएँ भेंट कीं।
भारतीय मूल के समाजसेवी श्री जगमोहन एस. चंद्रानी ने डॉ. संजय के सम्मान में भोज का आयोजन किया। इस दौरान भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों और जापान में भारतीय समुदाय की भूमिका पर चर्चा हुई।
यात्रा के दौरान डॉ. संजय ने हिरोशिमा पीस मेमोरियल म्यूजियम और उस ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण किया, जहाँ परमाणु बम गिराया गया था। वहाँ उन्होंने अपनी कविता ‘परिस्थितियाँ’ का वीडियो बनवाया। यह कविता अमर उजाला काव्य कोश में प्रकाशित है। हिरोशिमा का यह अनुभव उनके लिए मानवता और विश्व शांति का संदेश साझा करने का भावपूर्ण अवसर रहा।
उन्होंने माउंट फ़ूजी वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर, मियाजिमा, नारा के ऐतिहासिक मंदिरों और ओकिनावा का भी भ्रमण किया। ओकिनावा की जीवनशैली, प्राकृतिक सौंदर्य और वहाँ के लोगों के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।
उल्लेखनीय है कि प्रो. डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह संजय की जापान की पहली यात्रा 1990 में हुई थी। उस समय उन्होंने चीबा कैंसर सेंटर में अस्थि एवं सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर के उपचार से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उनकी वर्तमान यात्रा ने चिकित्सा, हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और भारत-जापान के शैक्षणिक संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।

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