जालंधर ब्रीज: बढ़ती ईंधन कीमतों और खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच पंजाब में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए Think Gas ने जालंधर में प्रमुख ट्रांसपोर्टर्स और फ्लीट ऑपरेटर्स के साथ बैठक आयोजित की। कंपनी ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) को कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में अपनाने पर जोर दिया।
कंपनी वर्तमान में 53 सीएनजी स्टेशनों का संचालन कर रही है और इस संख्या को बढ़ाकर 71 करने की योजना बना रही है, जिससे प्रमुख ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर ईंधन उपलब्धता और मजबूत होगी।

यह ट्रांसपोर्टर्स मीट जालंधर की अतिरिक्त उपायुक्त अमनिंदर कौर बरार की उपस्थिति में आयोजित की गई। बैठक में जिले के वरिष्ठ अधिकारी और ट्रांसपोर्ट समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए। ऐसे समय में आयोजित इस बैठक में ईंधन की बढ़ती कीमतें और वायु प्रदूषण को ट्रांसपोर्ट सेक्टर की बड़ी चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया गया।
बैठक के दौरान कंपनी अधिकारियों ने बताया कि सीएनजी अपनाने वाले फ्लीट ऑपरेटर्स वाहन की श्रेणी और रनिंग के आधार पर प्रति वाहन सालाना लगभग 5,60,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। 10 वाहनों की एक मध्यम फ्लीट के लिए यह बचत करीब 50 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है, जिससे पर्यावरणीय लाभ के साथ मजबूत आर्थिक फायदा भी मिलता है।

अपने अनुभव साझा करते हुए सुविधा ट्रांसपोर्ट के डायरेक्टर सतीश सचदेवा ने बताया कि हाल ही में अपने पांच ट्रकों को सीएनजी में परिवर्तित करने के बाद उनकी परिचालन लागत में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर हुई है और मेंटेनेंस खर्च भी घटा है। उन्होंने अन्य ट्रांसपोर्टर्स से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ को देखते हुए सीएनजी अपनाने पर विचार करने की अपील की।
अतिरिक्त उपायुक्त अमनिंदर कौर बरार ने कहा कि स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन विकल्प अपनाना अब आवश्यकता बन गया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरी वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। सीएनजी जैसे ईंधन अपनाने से प्रदूषण कम करने, कार्बन फुटप्रिंट घटाने और जनस्वास्थ्य सुधारने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-सीएनजी एवं मार्केटिंग और बिजनेस हेड राणा दत्ता ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य ट्रांसपोर्ट समुदाय को भरोसेमंद सीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर, निरंतर सप्लाई और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर बदलाव को आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के वर्ष 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य और ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
बैठक के समापन पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें ट्रांसपोर्टर्स ने वाहन कन्वर्जन की समयसीमा, निवेश पर प्रतिफल (आरओआई) और सप्लाई की निरंतरता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। बढ़ती डीजल कीमतों के बीच वैकल्पिक ईंधन के प्रति उनकी रुचि स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
इस अवसर पर वर्ष 2026 का कैलेंडर भी जारी किया गया। कार्यक्रम में थिंक गैस के वरिष्ठ अधिकारियों, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (जालंधर यूनिट) के प्रतिनिधियों तथा ट्रांसपोर्ट समुदाय के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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