आयोजनकर्ता: केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, जालंधर
जालंधर ब्रीज: भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अंतर्गत जालंधर (पंजाब) में स्थित केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र द्वारा दिनांक 5 एवं 6 अगस्त, 2025 को किसानों के लिए क्रमशः गाँव नारुआणा, ब्लॉक एवं जिला- बठिंडा तथा गाँव कोलियांवाली, ब्लॉक मलोट, जिला- श्री मुक्तसर साहिब में किसान खेत पाठशाला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में किसानों को मुख्य आयोजक कर्ता के रूप में चंद्रभान, सहायक पौध संरक्षण अधिकारी ने किसान खेत पाठशाला का महत्व बताया एवं व्याख्यान और खेत भ्रमण के माध्यम से बीमारियों और कीटों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान किसानों को कृषि पारिस्थितिक तंत्र विश्लेषण (AESA) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और किसानों को मित्र तथा शत्रु कीटों की पहचान के बारे में बताया, किसानों को आईपीएम तकनीकों द्वारा कीट ,बीमारी एवं खरपतवार प्रबंधन पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई तथा विभिन्न आई० पी० एम० टूल्स के बारे मे विस्तार से अवगत करवाया तथा खेत भ्रमण के दौरान खेतों में कपास की गुलाबी सुंडी के निरीक्षण हेतु फेरोमोंन ट्रैप एवं रस चूसने वाले कीटों के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप लगाए गए एवं किसानों को इनकी उपयोगिता के बारे में बताया गया। इसके साथ ही किसानों को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एनo पीo एसo एसo मोबाईल ऐप्लीकेशन के उपयोग के बारे में विस्तृत से बताया एवं इसकी उपयोगिता से किसानों को अवगत कराया गया।
कार्यालय से डॉ. अंकित कुमार, सहायक पौध संरक्षण अधिकारी ने कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सभी आईपीएम उपकरणों को अपनाकर फसलों के कीटों के प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया और कीटनाशकों के आवश्यकता आधारित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी तथा साथ ही किसानों को कीटनाशकों के अवशेषों के बारे में बताया तथा कीटनाशकों के सदुपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को बायो एजेंट, कीटनाशकों के उपयोग के समय रखी जाने वाली सावधानियों आदि से संबंधित एवं अन्य उपयोगी पोस्टर एवं पुस्तिकाएं भी वितरित की गई।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला बठिंडा से कृषि विकास अधिकारी दविंद्र सिंह ने भी भाग लिया एवं किसानों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से अवगत करवाया तथा मिट्टी एवं पानी की समय समय पर जांच करवाने हेतु प्रेरित किया तथा किसानों से कीटनाशक का जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही छिड़काव करने को कहा। इसके साथ ही लोगों को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के अंत में गांव के सरपंच के साथ साथ मौजूद सभी किसानों ने किसान खेत पाठशाला आयोजन करवाने के लिए धन्यवाद दिया।

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