February 12, 2026

Jalandhar Breeze

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मंत्रीमंडल द्वारा मलेरकोटला के मुबारक मंजि़ल पैलेस का अधिग्रहण करने और देखरेख करने की मंज़ूरी

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जालंधर ब्रीज: राज्य की शानदार विरासत की देखरेख करने की कोशिश के तौर पर मंत्रीमंडल ने आज संगरूर जि़ले में मुबारक मंजि़ल पैलेस, मलेरकोटला की अधिग्रहण, संरक्षण और उपयोग करने के लिए मंज़ूरी दे दी है। मुबारक मंजि़ल पैलेस के अधिग्रहण के लिए इस जायदाद को सभी अधिकारों के साथ सौंपने के एवज़ में सरकार बेग़म मुनव्वर-उल-नीसा को 3 करोड़ रुपए की राशि अदा करेगी। यह फ़ैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन मंत्रीमंडल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये हुई मीटिंग के दौरान लिया गया। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ़ैसला राज्य की समृद्ध विरासत को संभालने और हमारी शानदार पृष्टभूमि के साथ नौजवान पीढ़ी को जोडऩे में सहायक सिद्ध होगा। यह जि़क्रयोग्य है कि मलेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद ख़ान ने सरहिन्द के सूबेदार का विरोध करते हुए श्री गुरु गोबिन्द सिंह के छोटे साहिबज़ादे के हक में ज़ोरदार ढंग से अपनी आवाज़ बुलंद की थी, जिस कारण पंजाब के इतिहास में उनका बहुत ही सम्मानित स्थान है। नवाब शेर मोहम्मद ख़ान ने श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह, जो उस समय 7 साल और 9 साल की उम्र के थे, को जीते जी ही नींव में चिनवाने के हुक्म का खुलेआम विरोध किया था। नवाब शेर मोहम्मद ख़ान के इस बहादुरी भरे कदम के बारे में पता लगने पर दशमेश पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने उनको आशीर्वाद दिया और मलेरकोटला राज्य की सुरक्षा का वचन भी दिया।

गुरू साहिब जी ने नवाब शेर मोहम्मद ख़ान को ‘श्री साहिब’ भी भेजी। बताने योग्य है कि बेग़म मुनव्वर-उल-नीसा ने राज्य सरकार को लिखा कि मुबारक मंजि़ल पैलेस मलेरकोटला की वह अकेली मालिक है और वह इस जायदाद को राज्य या पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों संबंधी विभाग समेत किसी भी व्यक्ति को देने के पूरे अधिकार रखते हैं। इस जायदाद की असली मालिक होने के नाते उन्होंने यह भी बताया कि यह महल मूल्यवान विरासत संपत्ति है, जो 150 साल से अधिक पुरानी है और यह इमारत 32,400 स्कुअैर फुट में फैली हुई है, जिसको मलेरकोटला राज्य और पंजाब के इतिहास के अभिन्न अंग के तौर पर भविष्य के लिए सही ढंग से संभालने की ज़रूरत है।

इस मंतव्य के लिए वह अपनी इच्छा के अनुसार कुछ अलग-अलग शर्तों के साथ इस महल को अधिग्रहण, संभाल करने और प्रयोग करने के लिए राज्य को सौंपने की इच्छा रखते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के मुताबिक इस प्रस्तावित पैलेस की खऱीद और मौजूदा अदालती मामलों के निपटारे के लिए आज के मुताबिक संभावित वित्तीय देनदारी लगभग 5 करोड़ रुपए बनती है। इसकी ज़मीन की कीमत का मूल्यांकन डिप्टी कमिश्नर संगरूर से करवाया गया है और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों संबंधी विभाग द्वारा भी अपने कंजऱवेशन आर्कीटैक्ट और चीफ़ जनरल मैनेजर-कम-चीफ़ इंजीनियर के द्वारा मूल्यांकन करवाया गया है


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