May 16, 2026

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पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाला: दलित विद्यार्थियों के अधिकारों के साथ हुआ बड़ा धोखा – परमजीत कैंथ

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मामला आम घरों के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से संज्ञान लेने की भाजपा नेता परमजीत कैंथ की अपील

पांच साल तक एफआईआर में देरी ने पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक दबाव पर खड़े किए गंभीर सवाल

एससी विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कानून के सामने जवाब देना होगा — कैंथ

छात्रवृत्ति फंड की लूट में शामिल पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक नेताओं और दोषियों को मिले कड़ी सजा — कैंथ

जालंधर ब्रीज: परमजीत सिंह कैंथ, प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब ने पोस्ट मैट्रिक एससी छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा आखिरकार एफआईआर दर्ज किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया है कि वर्षों तक शासन और प्रशासन द्वारा दलित विद्यार्थियों के अधिकारों और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।

भाजपा नेता कैंथ ने कहा कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना था। इस प्रकार की कल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार केवल वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता पर सीधा हमला है। इस संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले को दबाने वाले व्यक्ति को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया हुआ है। इससे आम आदमी पार्टी के नेताओं की मिलीभगत, भ्रष्टाचार और मानसिकता का पर्दाफाश हुआ है तथा दलित विरोधी चेहरा उजागर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद ही कार्रवाई की गई। वर्ष 2016-17 के इस मामले में करोड़ों रुपये के अवैध भुगतान, फर्जी ऑडिट रिपोर्ट, डबल भुगतान, सरकारी फाइलों से छेड़छाड़ और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले को उजागर करने में नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट अलायंस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को दोबारा लागू करवाने के लिए वर्ष 2020 में सेक्टर-25 रैली ग्राउंड, चंडीगढ़ में कांग्रेस पार्टी की पंजाब सरकार के खिलाफ लगातार एक महीने तक धरना-प्रदर्शन और रोष प्रदर्शन किए गए, जिसके बाद पंजाब में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को लागू करवाने में सफलता प्राप्त हुई।

अनुसूचित जाति हितों की आवाज बुलंद करने वाले परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन गरीब एससी विद्यार्थियों के लिए यह छात्रवृत्ति थी, उनका भविष्य किसने बर्बाद किया? उन्होंने कहा कि केवल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इस घोटाले के पीछे रहे प्रभावशाली लोगों, शैक्षणिक संस्थानों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दलित विद्यार्थियों के अधिकारों की लूट किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती और इस घोटाले से जुड़े प्रत्येक दोषी को कानून के सामने जवाब देना होगा। “शिक्षा के साथ धोखा, सामाजिक न्याय के साथ धोखा है।”

हाईकोर्ट की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कैंथ ने कहा कि अदालत ने पांच वर्षों तक एफआईआर दर्ज न करने पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अंतरिम आदेशों की गलत व्याख्या करके उन्हें आपराधिक कार्रवाई से बचाव की ढाल बना लिया, जबकि आदेश केवल रिकवरी कार्रवाई तक सीमित थे।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली बेंच ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा द्वारा दी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन साथ ही सरकार की दलील को कानूनी रूप से अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि 2020 में ही संज्ञेय अपराध की जानकारी मिल गई थी, तो उसी समय एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के “ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार” फैसले का भी हवाला दिया।

कैंथ ने कहा कि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले ने केवल वित्तीय अनियमितताओं ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एससी विद्यार्थियों के लिए आरक्षित फंड के दुरुपयोग ने पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को उजागर किया है।

भाजपा नेता ने मांग की कि भगवंत मान सरकार इस घोटाले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपने की अनुमति दे तथा इससे जुड़े सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। साथ ही भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों के लिए आने वाली छात्रवृत्तियां बिना भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के सीधे योग्य लाभार्थियों तक पहुंचें।


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