April 12, 2026

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एमपी अरोड़ा ने 5वीं प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2023 में सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का उठाया मुद्दा

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जालंधर ब्रीज: लुधियाना से आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद (राज्यसभा) संजीव अरोड़ा ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, मोहाली में शुक्रवार को हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सत्र पर 5वीं प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2023 के दौरान ‘इवॉल्विंग हेल्थकेयर एंड मेडिकल इकोसिस्टम – अप्प्रेज़िंग, अडॉप्टिंग, अफेक्टिंग लाईव्ज़’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए पंजाब के लोगों खासकर जरूरतमंदों और गरीबों को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब में आप द्वारा शुरू किए गए मोहल्ला क्लीनिकों की भी सराहना की।

डॉ बलबीर सिंह, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, पंजाब; प्रदीप अग्रवाल, सीईओ स्टेट हेल्थ एजेंसी, पंजाब; और वीके मीणा, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, पंजाब इस अवसर पर अन्य के अतिरिक्त उपस्थित थे।

पैनल चर्चा में भाग लेने के बाद यहां अपनी वापसी पर अधिक जानकारी देते हुए अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वास्थ्य सेवा में सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की भागीदारी की जरूरत है, लेकिन सरकार को अधिक खर्च करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कुल जीडीपी का 1.98 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है जबकि दुनिया भर में यह लगभग 7 से 8 प्रतिशत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारी खर्च कहीं अधिक होना चाहिए जिससे जरूरतमंदों को मदद मिलेगी। यह खर्च स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान और वैकल्पिक चिकित्सा पर होना चाहिए।

अरोड़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि निजी क्षेत्र हमेशा राजस्व उत्पन्न करने के लिए पहले अपना हित देखता है।उन्होंने कहा कि वास्तव में, निजी क्षेत्र हमेशा अपनी कमाई करने की क्षमता की तलाश में रहता है। अगर सरकार की भागीदारी बढ़ाई जाए तो लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा के और मौके मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का विश्व औसत 18 प्रतिशत है, जबकि भारत में सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश 70 प्रतिशत से ऊपर है और राष्ट्रीय औसत लगभग 50 प्रतिशत है जो स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान योजना और सीजीएचएस के बावजूद बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि अंतत: इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

अरोड़ा ने फार्मा उद्योग से अनुरोध किया कि उसे स्वास्थ्य सुविधाओं को यथासंभव किफायती बनाना चाहिए। उन्होंने उठाए गए कदमों पर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रयासों की भी सराहना की और राज्य में सस्ती स्वास्थ्य देखभाल के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और भी बहुत कुछ आवश्यक है।

एक उदाहरण का हवाला देते हुए, अरोड़ा ने कहा कि वह डीएमसीएच, लुधियाना के गवर्निंग बॉडी में भी हैं, इसलिए, उन्हें आमतौर पर हर हफ्ते कुछ फोन आते हैं और अनुरोध करते हैं कि कृपया डॉक्टर से पूछें कि क्या उनके मरीज को बचाया जा सकता है और यदि ऐसा है तो मरीज को अस्पताल में रखा जाये अन्यथा, वे मरीज को अपने पास रख लेंगे। उन्होंने टिप्पणी की, “मुझे समझ में नहीं आता है कि एक मरीज को बचाकर डॉक्टर उनकी फेवर कर रहे हैं या उनकी डिसफेवर कर रहे हैं क्योंकि इलाज की लागत बहुत अधिक है जिससे उनका परिवार भारी ऋण के तले दब जाता है।

” उन्होंने कहा कि कहानी का सार यह है कि लोग स्वास्थ्य देखभाल पर भारी खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, “यही कारण है कि मैं कह रहा हूं कि हमें इलाज पर खर्च को कम करने और विशेष रूप से जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए किफायती स्वास्थ्य देखभाल का अधिक आश्वासन देने की आवश्यकता है।”अरोड़ा ने कहा कि कई बार गरीब लोग इलाज के लिए अस्पताल नहीं जाना चाहते हैं। कई लोगों के पास इतने पैसे भी नहीं होते कि वे अस्पताल में भर्ती हो सकें।

इस मौके पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने अरोड़ा को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए उनके विचारों की सराहना की। मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार आज के पैनल डिस्कशन में चर्चा किए गए सभी सुझावों और बिंदुओं पर विचार करेगी।


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