जालंधर ब्रीज: “मेरे दो बेटे नशे से मारे गए, पत्नी की भी मौत हो चुकी है, मेरी आंखों की रोशनी भी चली गई। न मेरा कोई आगे रहा, न पीछे। मैं गुरुद्वारे में रातें काट रहा हूं। पता नहीं मेरी मौत पर मेरी चिता को आग कौन लगाएगा।” अपनी आपबीती साझा करते हुए जालंधर जिले के बिलगा निवासी रमेश का रोना नहीं रुक रहा था।
रमेश जैसी ही कहानी जालंधर के तिलक नगर की एक अन्य महिला ने भी सुनाई। उन्होंने बताया, “मेरे दो बेटे नशे से मर चुके हैं। एक बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी और बच्चा घर छोड़कर चले गए। दूसरे की दो पत्नियां और दो बच्चे थे, वे भी चले गए। घर-बार तक बेच दिया। तिलक नगर में हर मोहल्ले में नशा है। पुलिस भी नशा बेचने वालों के साथ मिली हुई है।”
रमेश और तिलक नगर की यह महिला उन डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों में शामिल थे, जिनके परिवार नशे के कारण उजड़ चुके हैं। इनकी दुखभरी आवाज़ को मीडिया के सामने साझा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें स्टेट मीडिया प्रभारी विनीत जोशी उपस्थित थे।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से 18 सितंबर से चार नशा मुक्त पंजाब यात्राएं निकाली जा रही हैं। इन यात्राओं के 30 सितंबर को समापन के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जालंधर में एक विशाल रैली को संबोधित करने पहुंच रहे हैं। इन यात्राओं के दौरान ही पंजाब भाजपा की ओर से विभिन्न स्थानों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नशे के कारण उजड़े परिवारों की आवाज़ को मीडिया के माध्यम से उठाया जा रहा है।
👉 नशा बंद करने की बजाय, आवाज़ बंद की जा रही है’ : केवल ढिल्लों
नशा पीड़ित परिवारों की बातें सुनने के बाद पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि इन लोगों का दर्द सुनकर ही पंजाब की जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने पंजाब सरकार पर नशे के मुद्दे को लेकर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति “कूटना भी है और रोने भी नहीं देना” वाली बन गई है। पंजाब में नशा बंद करने की बजाय नशे के खिलाफ बोलने वालों की आवाज़ बंद करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को सिर्फ राजनीतिक यात्रा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह लोगों की आवाज़ और एक जन आंदोलन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 तक देश को नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है और पंजाब में भाजपा की सरकार बनने पर नशे को दो साल के भीतर जड़ से खत्म किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों के प्रमुख मुद्दे नशा, भ्रष्टाचार, गैंगस्टरवाद, कानून-व्यवस्था, उद्योग और रोजगार हैं। नशे से उजड़े परिवारों के पुनर्वास की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा नशा खत्म करने के साथ-साथ युवाओं के पुनर्वास पर विशेष ध्यान देगी।
ढिल्लों ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा हालात में लोगों की आवाज़ दबना चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार की मंशा हो तो नशे और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में गैंगस्टरवाद और मध्य प्रदेश में चंबल के डकैतों के खिलाफ कार्रवाई कर भाजपा सरकारों ने हालात बदले हैं, उसी तरह पंजाब में भी नशे के खिलाफ ऐसे ही सख्त कदम उठाए जाएंगे।
👉 नशे के कारण उजड़े परिवारों की आपबीती
तिलक नगर की सत्य देवी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा, “हमें यहां बुलाने के लिए धन्यवाद। हमारे घर तो उजड़ गए हैं, लेकिन मैं नहीं चाहती कि किसी और का घर भी उजड़े। रोटी भले न मिले, लेकिन हमें इस नशे से छुटकारा चाहिए। मेरे घर में एक बीमार है और मुझे डर है कि दूसरा भी नशे में न पड़ जाए। मैं चाहती हूं कि नशे की फैक्ट्रियां बंद हों, ताकि दूसरी माताओं को हमारा दुख न देखना पड़े।”
इसी तरह पुष्पा का कहना था, “मेरा बेटा नशा करता है। मैंने उसे पुलिस के हवाले किया था ताकि उसका इलाज हो सके। अब वह अमृतसर के अस्पताल में है। उसे टीबी भी हो गई है। घर में हम दो ही लोग हैं। मुझे कोई संपत्ति या पैसा नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ मेरा बच्चा ठीक चाहिए।”
जालंधर के गांव बिलगा की देबो ने बताया, “मेरा बेटा नशा करता था और आखिरकार नशे ने उसकी जान ले ली। अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। मेरी बहू भी घर छोड़कर चली गई। नशे ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया।”
जालंधर की ही ज्ञान कौर ने बताया, “मेरा बेटा रवि कुमार था। हमने जो कुछ भी बनाया था, वह धीरे-धीरे बेचता गया। मेरे पति भी शराब के आदी थे और उनकी भी मौत हो गई। अब मेरा एक बेटा अलग है और मैं यहां अकेली रह गई हूं। मुझे समझ नहीं आता कि मैं कहां जाऊं और क्या करूं। हमारी बर्बादी हो गई है। आज कम से कम किसी ने हमारी आवाज़ तो उठाई है।”
एक अन्य पीड़िता शमा ने बताया, “मेरा बेटा वंश चिट्टे का नशा करता है। मेरे पति भी शराबी हैं और उन्होंने कभी काम नहीं किया। अब बेटा भी नशे में फंस गया है। जो लड़के नशा छोड़ना चाहते हैं, उन्हें भी पुलिस वाले नहीं छोड़ते। मैंने पुलिस से कहा है कि इस समस्या की ओर ध्यान दिया जाए। हमें पता है कि बड़ी-बड़ी कोठियों वाले लोग भी नशा बेचते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। मैं लोगों के घरों में काम करती हूं और मेरा बेटा रोज सैकड़ों रुपये का नशा करता रहा है। मैं चाहती हूं कि यह नशा बंद हो।”


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