February 20, 2026

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पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में कंसोर्टियम ऑफ हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएचईआईएनआई) की पहली बैठक आयोजित की गई

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जालंधर ब्रीज:  उच्च शिक्षा के छह प्रमुख शिक्षण संस्थानों के कुलपति/डायरेक्टर शनिवार को पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा में आयोजित कंसोर्टियम ऑफ हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएचईआईएनआई) की प्रथम बैठक में शामिल हुए और उन्होंने शोध, शैक्षिक गतिविधियों और सामाजिक पहुंच के मामले में सहयोग को मजबूती देने हेतु एक रोडमैप की रूपरेखा तैयार करने पर मंथन किया।

इस कंसोर्टियम में जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ सहित उत्तर भारत क्षेत्र के 6 उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इस कंसोर्टियम की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर 29 जुलाई, 2023 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम के दौरान माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में किए गए थे। कंसोर्टियम की प्रथम  बैठक में उपरोक्त शिक्षण संस्थानों के कुलपति/डायरेक्टर ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हुए साझा संयुक्त अनुसंधान, ड्यूल डिग्री कार्यक्रम, जॉइंट डिग्री कार्यक्रम, संसाधन साझाकरण और सामाजिक पहुंच गतिविधियों जैसे नवीन सुधारों के कार्यान्वयन पर चर्चा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने इस बैठक के मेजबान के रूप में आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा, सीयू हरियाणा के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, सीयू राजस्थान के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव, सीयू हिमाचल प्रदेश कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल और सीयू जम्मू के कुलसचिव प्रो. यशवंत सिंह सहित सभी गणमान्य अतिथियों का अभिनंदन किया।  

प्रो. तिवारी ने अपने स्वागत भाषण में सीयू पंजाब की शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उपलब्धियों की संक्षेपित जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के युग में पूर्ण शिक्षा और उच्च-गुणवत्ता युक्त अनुसंधान को संचालित करने के लिए आपसी सहयोग सबसे महत्त्वपूर्ण कुंजी है। उन्होंने बठिंडा क्षेत्र के उच्च शिक्षा संस्थानों के कंसोर्टियमद्वारा इस क्षेत्र के शिक्षा और अनुसंधान स्तर को बेहतर करने की दिशा में हाल ही में हुई प्रगति को साझा किया और इस बात को रेखांकित किया कि सीएचईआईएनआई उत्तर भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य को परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इसके बाद, सभी प्रतिनिधियों ने एनईपी-2020 के विभिन्न सुधारों और अन्य नवीन पहलकदमियों को लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने संकाय और छात्रों के आदान-प्रदान, क्रेडिट हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, संयुक्त परामर्श, संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम, ड्यूल एवं जॉइंट डिग्री कार्यक्रम, संयुक्त कार्यशालाएं/संगोष्ठियां और संयुक्त इंटर्नशिप के कार्यान्वयन हेतु मौजूदा तकनीकी चुनौतियों को हल करने पर विचार विमर्श किया। सभी संस्थानों के प्रतिनिधि छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त इंटर्नशिप और संयुक्त पीएचडी की शुरुआत के लिए इसकी औपचारिकताओं पर कार्य करने पर सहमत हुए और उन्होंने इसे कंसोर्टियम का  प्रथम लक्ष्य माना।

आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा ने उल्लेख किया कि सहयोगात्मक अनुसंधान के साथ ही उच्च प्रभाव वाली शोधपत्रिकाओं में प्रकाशन संभव हो सकता है। यह कंसोर्टियम सभी केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के संकाय को परिचर्चा के माध्यम से समस्याओं के नवीन समाधान खोजने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कंसोर्टियम के उद्देश्यों को साकार करने में आईआईटी रोपड़ की ओर से हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

सीयू हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. एस. पी. बंसल ने इस बात पर जोर दिया कि यह कंसोर्टियम संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए एक उत्कृष्ट मंच के रूप में कार्य कर सकता है। वर्तमान में प्रत्येक केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थान ने विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान सुविधाएं और विशेषज्ञता हासिल की है। संसाधन साझेदारी से प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को एक विशेष क्षेत्र में अपनी सुपर स्पेशलाइजेशन विकसित करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, यह संकाय और छात्रों को शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए विभिन्न केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों की सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करेगा।

सीयू राजस्थान के कुलपति प्रोफेसर आनंद भालेराव ने कहा कि इस कंसोर्टियम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संवाद महत्वपूर्ण है। इसलिए, सभी उच्च शिक्षण संस्थान सदस्य अपने नोडल अधिकारी नामांकित करें, जो हर महीने नियमित रूप से मिलेंगे। प्रत्येक संस्थान के प्रमुख को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे कंसोर्टियम के प्रदर्शन की निगरानी करने और आगे की योजना बनाने के लिए साल में चार बार मिलें।

सीयू हरियाणा के कुलपति प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार ने रेखांकित किया कि अनुसंधान में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभ में पीएचडी के संयुक्त सुपरवाइज़र की नियुक्ति से इसकी शुरुआत की जा सकती है। इसी पहल के अंतर्गत एक शोधार्थी के पीएचडी कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई सह-सुपरवाइज़र नियुक्त किए जा सकते है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी सदस्य एचईआई के संकाय को उनकी पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस कंसोर्टियम के उद्देश्यों के प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।

सीयू जम्मू के कुलसचिव प्रो. यशवंत सिंह ने कहा कि यह कंसोर्टियम शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक अभिनव पहल है। उन्होंने सीयू जम्मू के कुलपति प्रोफेसर सतीश जैन की ओर से आश्वासन दिया कि उनका विश्वविद्यालय इस संघ के मिशन को पूरा करने में पूर्ण समर्थन प्रदान करेगा।

आईआईटी रोपड़ के डॉ. पुष्पेंद्र ने उल्लेख किया कि यह कंसोर्टियम डेटा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान द्वारा कृषि और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में चुनौतियों का प्रभावी समाधान खोजने के लिए विभिन्न विषयों के संकाय को प्रेरित करेगा।

विचार-विमर्श के बाद सभी प्रतिनिधियों ने एक विस्तृत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने इस बात पर सहमति प्रदान की कि प्रत्येक सदस्य उच्च शिक्षण संस्थान के अकादमिक डीन, अनुसंधान डीन और आईक्यूएसी निदेशक की एक टीम सितंबर 2023 में सीयू राजस्थान में दो दिवसीय बैठक के लिए एकत्रित होगी। यह टीम पहली बैठक में निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इस कंसोर्टियम की कार्य योजना के संबंध में एक श्वेत पत्र तैयार करेगी।

अंत में कार्यवाहक कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक प्रो. बी.पी. गर्ग ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर डीन इंचार्ज अकादमिक प्रो. आर.के. वुसिरिका, आर एंड डी सेल की निदेशक प्रोफेसर अंजना मुंशी, आईक्यूएसी निदेशक प्रोफेसर मोनिशा धीमान सहित विश्वविद्यालय के सभी विद्यापीठों के डीन भी उपस्थित थे।

यदि यह कंसोर्टियम अपने समझौता ज्ञापन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होता है, तो यह भारत के शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर-संस्थागत सहयोग के एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।


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