संगरूर जिले की वरिष्ठ पुलिस मशीनरी एसएचओ के सामने बेबस नजर आई
पंजाब पुलिस एवं सिविल कपड़ों में मौजूद लोगों ने मेरे साथ धक्का-मुक्की की
जालंधर ब्रीज: केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी करके राजनीतिक मर्यादाओं को पूरी तरह से गिरा दिया है, बजाय इसके कि वे पंजाब में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, पंजाब पुलिस के राजनीतिक दुरुपयोग और प्रशासनिक विफलताओं पर जवाब दें।
बिट्टू ने कहा कि अपने 17 वर्षों के संसदीय जीवन में उन्होंने हमेशा राजनीतिक गरिमा बनाए रखी और कभी भी विरोधियों पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए। लेकिन अमन अरोड़ा द्वारा लगातार उनके परिवार को निशाना बनाए जाने के बाद उन्हें जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने सवाल किया कि अमन अरोड़ा बताएँ कि उनके दिवंगत पिता स्वर्गीय भगवान दास अरोड़ा ने आत्महत्या क्यों की? वे Depression में क्यों चले गए? अमन अरोड़ा अपने माता-पिता को छोड़कर चंडीगढ़ क्यों चले गए? उन्होंने अपनी बहन के चंडीगढ़ स्थित घर पर जबरन कब्जा करने की कोशिश क्यों की? “जिस व्यक्ति का अपना चरित्र सवालों के घेरे में हो, वह मुझ पर उंगली कैसे उठा सकता है?” बिट्टू ने कहा।
अपने छोटे भाई के पंजाब पुलिस में एसपी होने को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बिट्टू ने स्पष्ट किया कि इस नियुक्ति को पहले ही माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी थी और फैसला उनके पक्ष में आया था।
उन्होंने कहा, “यदि किसी का भाई या बहन कानूनी तरीके से सरकारी सेवा में है तो इसमें गलत क्या है? हर व्यक्ति की अपनी अलग पहचान और करियर होता है। हम शहीदों के परिवार से आते हैं और पंजाब के लिए बलिदान दिया है।”
उन्होंने अपने दादा एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सरदार बेअंत सिंह को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब और देश को आतंकवाद से बचाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
बिट्टू ने कहा, “हमने आतंकवाद को बहुत करीब से देखा और झेला है। हम पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों के बलिदानों को समझते हैं। दुर्भाग्य से वर्तमान आप सरकार ने पुलिस बल का राजनीतिक इस्तेमाल किया है।”
अमन अरोड़ा पर सीधा राजनीतिक हमला करते हुए बिट्टू ने कहा कि जो नेता स्वयं लगातार विवादों और आरोपों से घिरे हों, उन्हें दूसरों के चरित्र और ईमानदारी पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने भगवंत मान सरकार पर निकाय चुनावों के दौरान पंजाब पुलिस का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
धूरी की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए बिट्टू ने सवाल उठाया कि वरिष्ठ भाजपा नेता ओंकार सिंह को क्यों हिरासत में लिया गया और उन्हें स्वयं क्यों रोका गया जबकि उन्होंने न तो धूरी में प्रवेश किया था और न ही किसी कानून का उल्लंघन किया था।
उन्होंने कहा, “मैंने धूरी के मतदाताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं से पहले ही वादा किया था कि यदि उनके साथ कोई अन्याय या अवैध कार्रवाई होगी तो मैं उनके साथ खड़ा रहूँगा। मैं आज भी अपने उस वादे पर कायम हूँ।”केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने लगभग सात घंटे तक प्रशासन से यह पूछते हुए इंतजार किया कि ओंकार सिंह को कहाँ ले जाया गया है और उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
बिट्टू ने कहा, “यदि प्रशासन मुझे रोकना चाहता था तो उचित बैरिकेडिंग क्यों नहीं की गई? पुलिसकर्मियों के साथ सिविल कपड़ों में अज्ञात लोग क्यों मौजूद थे? कई पुलिसकर्मियों के नेम प्लेट क्यों नहीं थे? पंजाब सरकार को इन गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।”
अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए बिट्टू ने कहा कि उनकी लड़ाई पंजाब पुलिस से नहीं है। उन्होंने कहा, “पंजाब पुलिस एक बहादुर बल है जिसने आतंकवाद के खिलाफ अद्भुत साहस और बलिदान दिया है। लेकिन आज आप सरकार के तहत इस बल की छवि और मनोबल को राजनीतिक हस्तक्षेप और दुरुपयोग के जरिए नुकसान पहुँचाया जा रहा है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने वर्षों से राजनीतिक नाटकों और सार्वजनिक टिप्पणियों के जरिए पंजाब पुलिस की छवि को कमजोर किया है।
बिट्टू ने अमन अरोड़ा द्वारा एफआईआर दर्ज करने को लेकर दिए गए कथित बयानों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब पंजाब में कानून व्यवस्था राजनीतिक निर्देशों से चलाई जा रही है या कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “शाम 5 बजे के बाद एक एसएचओ ने अपनी गाड़ी मेरे सामने खड़ी करके मेरा रास्ता रोका। उस दौरान मुझे अपनी सुरक्षा और अपनी पगड़ी बचानी पड़ी। मैंने बार-बार पूछा कि मुझे क्यों रोका जा रहा है और पुलिस के साथ मौजूद वे लोग कौन हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।”
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी राजनीतिक दबाव के सामने बेबस नजर आए और उन्होंने सवाल किया कि यदि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और पेशेवर थी तो मतदान के दौरान इतनी हिंसा और अराजकता क्यों हुई।
अपने बयान के अंत में बिट्टू ने कहा कि डराना-धमकाना, पुलिस मशीनरी का राजनीतिक दुरुपयोग और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिशें उन्हें पंजाब की जनता की आवाज उठाने से नहीं रोक सकतीं।
उन्होंने कहा, “पंजाब की जनता सब देख रही है। सच्चाई को बल प्रयोग, राजनीतिक प्रतिशोध या डर के जरिए दबाया नहीं जा सकता।”

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