जालंधर ब्रीज: भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई.सी.एस.एस.आर.), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित तथा राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एन.आई.टी.टी.टी.आर.), चंडीगढ़ एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान (वी.बी.यू.एस.एस.), उत्तर क्षेत्र केंद्र, चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 29-30 अगस्त 2025 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन एन.आई.टी.टी.टी.आर., चंडीगढ़ में किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “भारतीय शिक्षा के मनीषी श्री लज्जाराम तोमर जी का शिक्षा जगत में योगदान एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता।”
उद्घाटन सत्र 29 अगस्त को दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। प्रोफ़ेसर सुरेंद्र कुमार शर्मा (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात लज्जाराम तोमर जी पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया। मुख्य वक्तव्य प्रोफ़ेसर पी. एन. सिंह, निदेशक, आई.यू.सी.टी.ई., काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने दिया। विशेष अतिथि के रूप में प्रोफ़ेसर धनंजय सिंह, सदस्य सचिव, आई.सी.एस.एस.आर., नई दिल्ली ने अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर के. सी. शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वी.बी.यू.एस.एस. ने अपने संबोधन में लज्जाराम तोमर जी के शैक्षिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोड़ते हुए उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर नीलकमल पब्लिकेशन, नई दिल्ली एवं हैदराबाद द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों – गाइडेंस एंड काउंसलिंग / मार्गदर्शन एवं परामर्श, रिसर्च मेथड्स एंड बेसिक स्टैटिस्टिक्स / शोध पद्धतियाँ एवं मौलिक सांख्यिकी तथा दि इंटेलिजेंट एज: एम्ब्रेसिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन एवरीडे लाइफ़ / बुद्धिमान युग: दैनिक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाना – का विमोचन भी किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन प्रोफ़ेसर भोला राम गुर्जर, निदेशक, एन.आई.टी.टी.टी.आर., चंडीगढ़ ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफ़ेसर पंकज शर्मा (एन.आई.टी.टी.टी.आर., चंडीगढ़) ने प्रस्तुत किया।
शैक्षणिक सत्र – प्रथम दिवस
पूर्णांग सत्र में राजेंद्र सिंह बघेल (पूर्व शासी निकाय सदस्य, राज्य शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तर प्रदेश) एवं डॉ. अजय शर्मा (प्रशिक्षण एवं अकादमिक प्रमुख, ब्रज प्रांत विद्या भारती) ने अपने विचार रखे। संचालन प्रोफ़ेसर सुरेंद्र कुमार शर्मा ने किया। इसके उपरांत “भारतीय परंपरा आधारित शैक्षिक व्यवहार : श्री लज्जाराम तोमर के दृष्टिकोण से” विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसमें श्री अवनीश भटनागर, प्रोफ़ेसर पी. एन. सिंह तथा प्रोफ़ेसर मधुसूदन जे. वी. ने भाग लिया। संचालन डॉ. सुभाष मिश्र ने किया।
समानांतर तकनीकी सत्र–I एवं II में शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इनकी अध्यक्षता क्रमशः प्रोफ़ेसर अमित कौत्स (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर), प्रोफ़ेसर कौशल किशोर (जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली), प्रोफ़ेसर राकेश कुमार वत्स (एन.आई.टी.टी.टी.आर., चंडीगढ़) एवं प्रोफ़ेसर दीपा सिकंद कौत्स (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर) ने की। संचालन डॉ. अशोक कुमार, इंजीनियर रमा छाबड़ा, डॉ. मंजुल त्रिवेदी तथा डॉ. बलविंदर सिंह ढालीवाल ने किया।
शैक्षणिक सत्र – द्वितीय दिवस
30 अगस्त को “पंचकोष एवं पंचपदी की प्रासंगिकता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित हुई। इसमें डॉ. राजेश व्यास, प्रोफ़ेसर सुभाष घाखर, प्रोफ़ेसर जे. एन. बलिया एवं प्रोफ़ेसर कुलदीप सिंह कटोच ने विचार प्रस्तुत किए। इसके पश्चात “समग्र विकास और पंचपदी पद्धति” विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रोफ़ेसर के. सी. शर्मा ने की। इसमें डॉ. सूर्यकांत, डॉ. सुभाष मिश्र, डॉ. शशि रंजन अकेला एवं डॉ. अशोक कुमार ने अपने विचार रखे। समानांतर तकनीकी सत्र–III (सम्मेलन कक्ष-I) में भी शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इसकी अध्यक्षता प्रोफ़ेसर बी. सी. चौधरी एवं डॉ. बलविंदर सिंह ढालीवाल ने की।
समापन सत्र गरिमामयी वातावरण में आयोजित हुआ। प्रोफ़ेसर विमल किशोर (केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड) ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। प्रोफ़ेसर पंकज शर्मा (एन.आई.टी.टी.टी.आर., चंडीगढ़) ने संगोष्ठी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर पी. एन. सिंह ने शिक्षा दर्शन और शोध के समन्वय पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि श्री के. एन. रघुनंदन, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, वी.बी.यू.एस.एस. ने अपने वैलेडिक्टरी संबोधन में भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की संगति पर गहन विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन प्रोफ़ेसर भोला राम गुर्जर ने प्रस्तुत किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफ़ेसर सुरेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

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