जालंधर ब्रीज: केंद्रीय विदेश एवं संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति पथ पर अग्रसर हो रहा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू करने का विचार देश की सामूहिक प्रगति के लिए सभी को साथ लेकर चलने वाला उनका एक और सकारात्मक कदम है।

श्रीमती लेखी आज लुधियाना में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में कारीगरों और शिल्पकारों को संबोधित कर रही थघ। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री का मंत्र – सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास- सभी को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में मदद करेगा और विशेष रूप से उन वर्गों के लोगों की जिनकी पहले उपेक्षा की जा रही थी।
कार्यक्रम के दौरान नई दिल्ली से प्रधानमंत्री द्वारा आज विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर योजना की औपचारिक शुरुआत का सीधा प्रसारण भी प्रदर्शित किया गया। यहां करवाएं गए आज के इस कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से संबंधित 700 से अधिक कारीगर और शिल्पकार शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि असंगठित क्षेत्र के ऐसे कारीगरों और शिल्पकारों को जीवन में प्रगति करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए आर्थिक रूप से लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के 18 विभिन्न वर्गों को लाभ मिलेगा जो स्व-रोजगार करते हैं और असंगठित क्षेत्र के तहत कार्यरत हैं। उन्होंने सभी कारीगरों और शिल्पकारों को इस योजना से लाभ लेने का आह्वान किया।

पीएम विश्वकर्मा योजना एक केंद्र समर्थित योजना जिसमें अन्तर्गत 13000 करोड़ रुपये वित्तीय परिव्यय लाभ उपलब्ध करवाया जाएगा । इस योजना लक्ष्य गुरु-शिष्य परंपरा या अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा पारंपरिक कौशल के परिवार-आधारित अभ्यास को मजबूत और पोषित करना है। यह पूरे भारत में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से सहायता प्रदान करेगा।
पीएम विश्वकर्मा योजना में पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड सहित विभिन्न घटकों के माध्यम से कारीगरों और शिल्पकारों को हरेक कदम पर सहायता प्रदान करने की योजना बनाई गई है । यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों को विश्वकर्मी के रूप में मान्यता देते हुए उन्हें सभी प्रकार के लाभों का फायदा उठाने के लिए योग्य बनाती है। इसके अन्तर्गत विश्वकर्मा भाई- बहनों को तीन लाख रुपए तक बिना गारंटी ऋण शामिल है। लाभार्थियों को 15 हजार रुपए तक की टूल किट, स्किल अपग्रेडेशन (कौशल उन्नयन ) के लिए प्रशिक्षण और 500 रुपए प्रतिदिन तक का स्टाइपेंड ( वजीफा) , तैयार उत्पादों के लिए गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और विज्ञापन जैसी विपणन सहायता दी जाएगी।
जिन लोगों को इससे लाभ होगा उनमें लकड़ी आधारित व्यापार के तहत सुथार/ बढ़ई , नाव निर्माता (बनाने वाले) , लौह/धातु आधारित/पत्थर आधारित व्यापार के अंतर्गत काम करने वाले, अस्त्रकार, लौहार, हथौड़ा और टूल किट निर्माता, ताला बनाने वाले, मूर्तिकार (मूर्तिकार) पत्थर तराशने वाले, पत्थर तोड़ने वाले, सुनार, कुम्हार, मोची, टोकरी/झाड़ू/चटाई बनाने वाले, नाई, माला बनाने वाले, दर्जी, धोबी, मछली पकड़ने के जाल बनाने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेष ध्यान रखा गया है, जो पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके ऐसी सामग्री तैयार करने के लिए हाथ से कार्य करते हैं। गुड़िया और खिलौना निर्माता (पारंपरिक) और शिल्पकार जो ऊन, धागे, कपास, लकड़ी आदि जैसी सामग्रियों का उपयोग करके गुड़िया और खिलौने बनाने के लिए अपने हाथों और उपकरणों का उपयोग करते हैं, वे भी इस पीएम विश्वकर्मा योजना का हिस्सा हैं।

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