जालंधर ब्रीज: पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वह कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक से कथित तौर पर जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले को शांत कर रही है, जबकि इस मामले में पीड़ित ने एक वीडियो बयान में पूरी घिनौनी कहानी बयां की थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाजवा ने कहा कि आप सरकार द्वारा मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक जिस तरह से यह प्रदर्शित किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार बेहिचक यौन अपराधी मंत्री का बचाव कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘डीआईजी (बॉर्डर रेंज, अमृतसर) नरिंदर भार्गव की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन वास्तव में जघन्य यौन अपराध के आरोपों की जांच के लिए नहीं किया गया था. बाजवा ने आगे कहा कि इस एसआईटी के पीछे छिपा मकसद पीड़ित व्यक्ति पर अपनी शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डालना था जो उसने कैबिनेट मंत्री के खिलाफ दायर की थी।
नेता प्रतिपक्ष ने एक बयान में कहा कि तथाकथित जांच के दौरान एसआईटी ने न केवल पीड़ित और उसके परिवार को परेशान किया, बल्कि पीड़ित परिवार की मदद के लिए आने वालों के खिलाफ फर्जी प्राथमिकी भी दर्ज की। क्या एसआईटी को इस तरह एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े मामले की जांच करनी चाहिए थी?
विपक्ष के नेता ने कहा, ”इस बीच, इस विशेष मामले में एसआईटी के कामकाज में ‘चूक’ को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अमृतसर सीमा रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को तलब किया है।
बाजवा ने कहा, ‘मैं एनसीएससी के अध्यक्ष विजय सांपला से कैबिनेट मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह करता हूं क्योंकि पूरा पंजाब उत्सुकता से इस मामले को देख रहा है और पंजाब के लोग चाहते हैं कि इस पर न्याय हो।
बाजवा ने कहा कि कैबिनेट मंत्री के खिलाफ काफी सबूत मिले हैं। पंजाब के राज्यपाल द्वारा मांगी गई फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट में पहले ही कहा गया था कि कैबिनेट मंत्री और युवा पुरुष पीड़िता के कथित यौन उत्पीड़न के वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। हालांकि पंजाब के राज्यपाल पहले ही इसे जघन्य अपराध करार दे चुके हैं।

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