जालंधर ब्रीज: आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि दूसरे देशों पर खाद्य तेलों के लिए भारत की निर्भरता पर पुनर्विचार करने का यह बेहद उपयुक्त समय है। चीमा ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेलों का आयात करता है जबकि देश के किसान इन चीजों का उत्पादन करने में पूरी तरह सक्षम हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की गलत कृषि नीतियों के कारण देश को हजारों करोड़ के ऐसे खाद्द पदार्थ विदेशों से मंगवाने पड़ते है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही भारत को सही मायने में ‘आत्मनिर्भर’ बना सकती है।
आप नेता ने कहा कि भारत हर साल यूक्रेन से 1,371 मिलियन डॉलर मूल्य का सूरजमुखी का तेल आयात करता है। यदि पंजाब के केवल के दो जिले सूरजमुखी की खेती शुरू कर दे तो देश की यह जरुरत आसानी से पूरी हो सकती है। चीमा ने कहा कि तिलहन फसलों उचित मार्केटिंग नहीं होने और कई फसलों पर एमएसपी नहीं होने के कारण देश के किसान फसलों में बदलाव नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत 1,371 मिलियन डॉलर का सूरजमुखी का तेल आयात करने की बजाए वह पैसा तिलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए किसानों पर खर्च करे तो भारत तिलहन का आयात करने की जगह निर्यात करने की स्थिति में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि आज दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता कांग्रेस और भाजपा सरकारों की नाकामी का सबूत है।
चीमा ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि क्षेत्र में भारत की निर्यात-आयात के घाटे को सही कृषि नीतियों और कृषि आधारित उद्योगों से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं और चावल सहित अन्य फसलों की सही मार्केटिंग और एमएसपी सुनिश्चित किया जाए तो भारत कृषि आधारित उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास भारत की खाद्य तेलों की जरूरतें पूरा करने की पर्याप्त क्षमता है। बशर्ते कि तिलहन की खेती के लिए किसानों को सरकार प्रोत्साहित करे।
चीमा ने सवाल करते हुए कहा कि आखिर हरित क्रांति के बाद भारत में कोई और कृषि क्रांति नहीं हुई, जो खाद्द पदार्थों के मामले में भारत को आत्मनिर्भरता बना सके और किसानों की आर्थिक हालत सुधार सके। उन्होंने कहा कि कृषि और किसानों से संबंधित नीतियां तैयार करने में कांग्रेस-भाजपा सरकारों में हमेशा दूरदर्शिता और सही मंशा नहीं होती है। यही कारण है कि कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भारत खाद्द उत्पादों के लिए आज भी दूसरे देशों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि पंजाब सहित पूरे भारत में कृषि क्षेत्र के विकास और खाद्द उत्पादों व खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए दूरदर्शी एवं ठोस नीतियां बनाने की जरूरत है। कृषि क्षेत्र में आत्म निर्भर बनने से हम और भी कई मामलो में विकास कर सकते हैं।

More Stories
मेहरचंद पॉलिटेक्निक में नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लैब स्थापित
विकसित भारत’ के सपने और उच्च नैतिकता का एक उत्कृष्ट संगम ‘मिज़ोरम’
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय कार्यक्रम में प्रो. डॉ. संजय अध्यक्ष, एम्स गुवाहाटी का संबोधन