March 16, 2026

Jalandhar Breeze

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जनता का फोन नहीं उठाते नगर निगम के हेल्थ ऑफिसर डॉ. श्री कृष्ण मेयर विनीत धीर ने दिखाई तत्परता, बर्लटन पार्क के कूड़े के मुद्दे पर तुरंत लिया संज्ञान

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फोटो बर्लटन पार्क में चल रहे कार्य की फोटो जहां बर्लटन पार्क से निकलने वाले गिले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र कर उसकी खाद बनायी जाएगी

जालंधर ब्रीज: नगर निगम के हेल्थ ऑफिसर डॉ. श्री कृष्ण पर नागरिकों की अनदेखी और लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, जिससे नगर निगम की छवि भी खराब होती दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार, जालंधर के बर्लटन पार्क में सुबह की सैर करने वाले कई नागरिक कूड़े की समस्या से काफी परेशान थे। नागरिकों ने इस संबंध में नगर निगम के हेल्थ ऑफिसर डॉ. श्री कृष्ण को कई बार फोन कर समस्या से अवगत कराने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि उन्होंने किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अधिकारियों को यह लगता है कि किसी काम में उनका कोई स्वार्थ नहीं है, तो वे नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते।

इसके बाद सुबह सैर करने वाले नागरिकों ने अपनी समस्या मीडिया के सामने रखी और समस्या की गंभीरता को देखते हुए जालंधर के मेयर विनीत धीर से संपर्क किया गया तो उन्होंने तुरंत फोन उठाकर पूरी बात ध्यान से सुनी और लोगों को भरोसा दिलाया कि शहर या किसी भी मोहल्ले का कूड़ा बर्लटन पार्क में नहीं फेंका जाएगा।

मेयर विनीत धीर ने यह भी स्पष्ट किया कि बर्लटन पार्क में चल रहे प्रोजेक्ट के दौरान वहां की इमारतों से निकलने वाले खाने-पीने के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र कर उसकी खाद बनाई जाएगी और उसी पार्क में इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि स्वच्छता भी बनी रहे और पर्यावरण को भी कोई नुकसान न हो।

शहर के नागरिकों का कहना है कि एक अधिकारी का कर्तव्य होता है कि वह जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुने और उनका समाधान करे। जब अधिकारी जनता के फोन तक नहीं उठाते, तो लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठने लगता है।

लोगों ने मेयर विनीत धीर से मांग की है कि नगर निगम के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे शहरवासियों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करें और अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं।

नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते रहेंगे, तो इससे न सिर्फ नगर निगम की छवि खराब होगी बल्कि प्रशासन पर जनता का विश्वास भी कमजोर होगा। ऐसे में जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए भटकना न पड़े।


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