April 13, 2026

Jalandhar Breeze

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विकसित भारत’ के सपने और उच्च नैतिकता का एक उत्कृष्ट संगम ‘मिज़ोरम’

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डॉ. विक्रम सिंह

जालंधर ब्रीज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत का विजन केवल भारत के मैदानी राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में भी उनके इस विजन की झलक देखने को मिलती है। वास्तव में, यह पूरे देश के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के साथ-साथ अपनी अनूठी संस्कृति के लिए जाने जाने वाले मिज़ोरम राज्य में भी दिखाई देता है।अब तक मिज़ोरम अपने अद्वितीय शिष्टाचार और ईमानदारी के लिए जाना जाता था।

लेकिन अब से, यह कभी साकार न होने वाले सपने को दृढ़ संकल्प के साथ वास्तव में साकार करने के लिए भी जाना जाएगा। दरअसल, अपनी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मिज़ोरम की धरती पर रेलवे लाइन का सपना देखना तो दूर, शायद सोचा भी नहीं जा सकता था। लेकिन 13 सितंबर, 2025 का दिन मिज़ोरम राज्य के लिए एक ऐतिहासिक दिन सिद्ध हुआ। यह वह दिन था जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर मिज़ोरम को भारतीय रेल के राष्ट्रीय नक्शे पर स्थापित किया।

उनके हाथ में लहरा रही हरी झंडी ने यह भी साबित कर दिया कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण, साहस और अपने देशवासियों की सेवा के लिए कुछ कर दिखाने का जज़्बा हर कठिन से कठिन बाधा को भी विफल करके सपनों को साकार कर सकता है।यूं तो यह बेराइवी से सारंग तक की सिर्फ 51.38 किलोमीटर की रेल लाइन है। लेकिन पहाड़ों में जिस वैज्ञानिक तरीके से करीब 45 सुरंगों और 88 पुलों को बनाकर यह रेल लाइन बिछाई गई है, उसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। इस रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हुए अभी करीब 200 से अधिक दिन ही हुए हैं, लेकिन इसके सकारात्मक परिणाम मिज़ोरम को मिलने शुरू हो गए हैं।

बेराइवी से सारंग तक, जहाँ सड़क मार्ग से चार से पांच घंटे का समय लगता था, वहीं यह यात्रा रेल मार्ग से केवल डेढ़ घंटे की रह गई है। यह रेल लाइन उत्तर भारत की कालका-शिमला रेल लाइन जैसी रमणीयता तो प्रदान करती ही है, बल्कि इसके माध्यम से पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार आदि के क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिला है। शुरुआती दिनों में, इस रेल लाइन के माध्यम से, विशेषकर सीमेंट, बजरी और रेत का परिवहन होने के कारण, इनकी कीमतें पहले की तुलना में काफी कम हो गई हैं।

राज्य में निर्माण कार्यों की गति पहले की तुलना में तेज हो गई है।मिज़ोरम के परिवहन क्षेत्र का विकास अटूट हिम्मत का प्रतीक तो है ही, बल्कि खुशदिल लोगों का यह प्रदेश शिष्टाचार और ईमानदारी का सबक भी सिखाता है। करीब ग्यारह लाख की आबादी वाले इस प्रदेश के चाहे सबसे अधिक आबादी (करीब पांच लाख) वाले शहर आइजोल चले जाओ या इसके बाकी दस जिलों की किसी भी गली में जाओ, वहाँ लोगों के व्यवहार में ‘पहले आप’ वाला शिष्टाचार हर जगह महसूस होगा।इस राज्य की सड़कों पर दौड़ते वाहनों से कभी हॉर्न की आवाज नहीं सुनाई देती। इसी कारण मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को ‘भारत की साइलेंट सिटी’ का दर्जा मिला हुआ है। यहाँ सड़कों पर जाम लगते ही सभी वाहन एक कतार में खड़े नज़र आते हैं। जब कोई व्यक्ति पैदल चलते हुए सड़क को पार करने के लिए रुकता है, तो चलते हुए वाहन स्वतः सम्मानपूर्वक रुक जाते हैं।

यहाँ खास बात यह है कि वाहन रोकने वाले के चेहरे पर गर्व भरी प्रसन्नता होती है, न कि माथे पर शिकन! हैरान करने वाली बात यह भी है कि यहाँ किसी सड़क पर न तो ट्रैफिक लाइटें हैं और न ही वाहनों का चालान काटने वाली पुलिस। ट्रैफिक नियमों का पालन यहाँ के लोगों के लिए ‘डर’ नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है।मिज़ोरम की कुल जनसंख्या में महिलाओं की संख्या करीब आधी है। महिलाओं के प्रति इस राज्य का सकारात्मक दृष्टिकोण इस पहलू से स्पष्ट होता है कि इस धरती पर बेटियों के माता-पिता के शब्दकोश में ‘दहेज’ शब्द का अस्तित्व ही नहीं है।

यहाँ की परंपराओं के अनुसार मिज़ोरम का पुरुष अपने होने वाले ससुराल वालों से विवाह की अनुमति लेने जाता है और उसे विवाह के लिए लड़की वालों को शगुन के तौर पर कुछ सौ रुपये देने पड़ते हैं। महिलाओं का महत्व केवल मिज़ोरम की परंपराओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ घूमने पर हर तरह के काम से संबंधित लगभग 95 प्रतिशत दुकानें ऐसी मिलेंगी, जिन्हें पूरी तरह महिलाएं ही संभाल रही हैं। यह मिज़ोरम की महिलाओं के आत्मनिर्भर होने और राज्य की प्रगति में उनकी भागीदारी का एक उत्तम उदाहरण है।मिज़ोरम में बिना दुकानदार वाली दुकानों की एक अनूठी परंपरा है। ये दुकानें विश्वास की नींव पर चलती हैं। यहाँ से ग्राहक अपनी पसंद का सामान ले सकते हैं और सामान के पास रखे डिब्बे में पैसे डाल सकते हैं या ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।

यह प्रथा मिज़ो संस्कृति के मूल में गहराई से निहित है, जो ईमानदारी और सामुदायिक सद्भाव पर ज़ोर देती है। यह दुकानें खासकर हाईवे के किनारों पर मिलती हैं, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ किसानों के लिए परिवहन लागत के कारण बाजारों तक पहुँचना कठिन होता है।अब सवाल यह उठता है कि मिज़ोरम की धरती पर ऐसी समृद्ध और सुसंस्कृत जीवन-शैली का राज क्या है। वास्तव में, इसके पीछे मिज़ोरम की धार्मिक संस्थाओं, ‘यंग मिज़ो एसोसिएशन’ और भारत के सर्वाधिक साक्षरता दर वाले राज्य (लगभग 98.2%) होने की एक विशेष भूमिका है। रविवार को मिज़ोरम लगभग बंद रहता है, क्योंकि इस दिन यहाँ के लोग धार्मिक स्थानों पर एकत्र होते हैं। धार्मिक स्थानों में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी को नैतिकता का पाठ सिखाया जाता है।

इसके अतिरिक्त, मिज़ोरम में ‘यंग मिज़ो एसोसिएशन’ राज्य की सबसे बड़ी स्वयंसेवी संस्था है, जिसके चार लाख से अधिक सदस्य हैं। इस संस्था की गतिविधियाँ मिज़ो लोगों के सामाजिक जीवन का मार्ग-दर्शन करती हैं।वास्तव में, मिज़ोरम प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने और उच्च नैतिकता का एक उत्कृष्ट संगम है।

अपनी शालीनता, अनुशासन, ईमानदारी और आत्मनिर्भर महिलाओं के माध्यम से यह राज्य सिद्ध करता है कि वास्तविक विकास वहीं होता है जहाँ आधुनिकता और संस्कार एक-दूसरे का हाथ थामकर चलते हैं।

संपर्क: 98884 13836(लेखक भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी हैं।)


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