जालंधर ब्रीज: पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा की राष्ट्रीय सेवा योजना ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को “नशा मुक्त समाज आंदोलन – अभियान कौशल का: भारत में नशे की लत के रोकथाम हेतु सामाजिक, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और अन्य उपाय” विषयक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विशिष्ट अतिथियों ने हमारे समाज में युवाओं को नशा नहीं करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए भाग लिया।

आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री कौशल किशोर इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। बठिंडा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से सांसद हरसिमरत कौर बादल और एम्स बठिंडा के निदेशक प्रो. डी.के. सिंह इस कार्यक्रम में सम्माननीय अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, लुधियाना से डॉ. भोलेश्वर प्रसाद मिश्रा, इस अभियान के राष्ट्रीय संयोजक अक्षत कांत, बठिंडा के उपायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट शौकत अहमद पारे और बठिंडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जे. एलानचेझियन ने इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने “नशा मुक्त समाज आंदोलन – अभियान कौशल का” नामक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए माननीय मंत्री महोदय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने युवाओं को अच्छी आदतों को अपनाने और नशीली दवाओं से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर आवासन और शहरी कार्य के राज्य मंत्री कौशल किशोर ने स्थानीय समुदाय को कानूनी साक्षरता प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपने परिसर में लीगल एड क्लीनिक शुरू करने के अभिनव प्रयास की सराहना की। उन्होंने युवाओं में शराब एवं नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई। उन्होंने कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है जो न केवल हर साल लाखों लोगों की जान लेता है बल्कि हमारे समाज में अपराध की वृद्धि का कारण भी है। कौशल ने कहा, “शराब पर प्रतिबंध लगाना इस समस्या का समाधान नहीं है क्योंकि यह अन्य अवैध नशीले पदार्थों के उपयोग और जहरीली शराब के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है। नशे की लत से बचने लिए युवाओं को पहली बार में ही ड्रग्स के सेवन को मना कर देना चाहिए।”

कोशल किशोर ने बताया कि उन्होंने नशे की लत के कारण वर्ष 2020 में अपने बेटे आकाश किशोर को खो दिया था। उन्होंने सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार के बावजूद अपने बेटे की जान बचाने में खुद को असहाय महसूस किया। इस के बाद उन्होंने युवाओं को नशे की लत से दूर करने हेतु राष्ट्रीय अभियान शुरू करने का संकल्प लिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने विश्वविद्यालय परिसर को नशा मुक्त बनाने और हमारे समाज से नशे के उन्मूलन की दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। अपने संबोधन के दौरान श्री कोशल किशोर ने प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के अंतर्गत सीयूपीबी छात्रों ने “नशे की लत पर जागरूकता शो” नामक लघु नाटिका प्रस्तुत की।
बठिंडा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लघु नाटिका शो में छात्रों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर बच्चे नशा न करने का प्रण करें तो निकट भविष्य में भारत निस्संदेह नशामुक्त देश और आत्मनिर्भर देश होगा। उन्होंने प्रतिभागियों से बठिंडा, पंजाब और देश को नशा मुक्त बनाने के अभियान को समर्थन देने के लिए पंजाब के निवासियों से अपील की।
एम्स बठिंडा के निदेशक प्रो. डी.के. सिंह ने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन न केवल ऐसी दवाओं का सेवन करने वाले व्यक्तियों को नष्ट कर रहा है, बल्कि उन रोगियों के लिए महत्वपूर्ण दवाओं की कमी भी पैदा कर रहा है जिन्हें दर्द प्रबंधन की सख्त जरूरत है। उन्होंने समाज में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या पर चर्चा करते हुए बताया कि मादक द्रव्यों के सेवन के विस्तार के कारणों की पहचान करने, साथियों के दबाव और प्रलोभन से बचने, मानसिक बीमारी के लिए डाक्टरी उपचार लेने और एक संतुलित जीवन शैलीअपनाने द्वारा रोका जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नशा एक जटिल बीमारी है लेकिन इसका इलाज संभव है।
दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, लुधियाना के डॉ. भोलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने अपने संबोधन में नशेड़ियों के व्यसनों की प्रकृति, सीमा, प्रकार, कारण, प्रभाव और नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं की विशेषताओं के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने चिंता, तनाव, साथियों का दबाव, दूसरों से जुड़ने में असमर्थता आदि जैसे विभिन्न कारकों पर चर्चा की जो युवाओं को मादक द्रव्यों की लत में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति व्यायाम और स्वस्थ आहार के माध्यम से खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है, उसके नशे में पड़ने की संभावना कम होती है। उन्होंने सभी से नशा मुक्त भारत अभियान में भाग लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की सारांश रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ. विपन पाल सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान 12 राज्यों के शोधार्थियों द्वारा लगभग 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अपने उद्बोधन में परीक्षा नियंत्रक और कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. बी.पी. गर्ग ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान गणमान्य वक्ताओं एवं शोधार्थियों के विचार-विमर्श से नशे की लत की समस्या का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। अंत में उन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विशिष्ट अतिथियों का आभार प्रकट किया और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के साथ-साथ ग्राम घुद्दा के निवासियों ने भी भाग लिया।

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