February 25, 2026

Jalandhar Breeze

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मान सरकार ‘जीवनजोत प्रोजेक्ट 2.0’ के तहत प्रदेश को बाल भिक्षा मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर कर रही है प्रयास; भीख मांगते 21 बच्चों को किया गया रेस्क्यू: डॉ. बलजीत कौर

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जालंधर ब्रीज: पंजाब सरकार द्वारा प्रदेश को भिक्षा मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि ‘जीवनजोत प्रोजेक्ट 2.0’ के तहत लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिलों से कुल 21 भीख मांगते बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।

उन्होंने बताया कि विभाग की जिला बाल सुरक्षा टीम द्वारा लुधियाना के बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर विशेष छापेमारी करके 18 बच्चों को बचाया गया, जबकि शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) से 3 अन्य बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इन सभी बच्चों को बाल कल्याण समितियों के समक्ष प्रस्तुत करके फिलहाल सुरक्षित तौर पर बाल घरों में रखा गया है।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यदि जांच के दौरान यह सिद्ध होता है कि किसी व्यक्ति द्वारा इन बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर किया गया है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी बच्चे के माता-पिता होने को लेकर शक होता है, तो बाल कल्याण समितियों द्वारा डिप्टी कमिश्नर के आदेशों के तहत डीएनए जांच भी करवाई जा सकती है, ताकि बच्चों की वास्तविक पहचान का पता लगाया जा सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का सीधा उद्देश्य है कि हर बच्चे को सुरक्षित और बेहतर भविष्य वाला जीवन मिले। ‘जीवनजोत 2.0’ के तहत विभाग की ज़िला टीमें विभिन्न स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) के अलावा किसी अन्य जिले में भीख मांगते बच्चों के मामले सामने नहीं आए हैं, जो राज्य सरकार की जागरूकता मुहिम और नीतिगत इरादों की सफलता को दर्शाता है।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि राज्य से बाल भिक्षावृत्ति की भयावह समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सामाजिक सुरक्षा विभाग की ज़िला कल्याण टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रकार की चेकिंग और छापेमारी लगातार जारी रखेंगी, ताकि एक भी बच्चा भीख मांगने के लिए मजबूर न हो।

अंत में उन्होंने राज्यवासियों से अपील की कि किसी भी बच्चे को भीख न दी जाए और यदि कहीं कोई बच्चा भीख मांगता नज़र आए, तो तुरंत 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना दी जाए, ताकि उस बच्चे को तुरंत सुरक्षा, देखभाल और उज्जवल भविष्य उपलब्ध कराया जा सके।


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