March 23, 2026

Jalandhar Breeze

Hindi Newspaper

हॉर्नबिल फेस्टिवल, सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: पद्म श्री डॉ. संजय

Share news

जालंधर ब्रीज: नागालैंड विश्वविद्यालय के कोहिमा परिसर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “पूर्वोत्तर का आदिवासी समाज: साहित्य, संस्कृति और परम्परा” का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा किया गया।

समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि, पद्म श्री से सम्मानित प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय, अध्यक्ष एम्स गुवाहाटी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर नागालैंड, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगभग 200 जनजातियाँ निवास करती हैं और वहाँ करीब 400 भाषाएँ बोली जाती हैं, जो इसकी अद्वितीय सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।

उन्होंने विशेष रूप से नागालैंड के प्रसिद्ध हॉर्नबिल फेस्टिवल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उत्सव विभिन्न जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराओं, लोकनृत्यों, संगीत और जीवन शैली का जीवंत संगम है, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नागालैंड की विशिष्ट पहचान को स्थापित करता है। नागा समाज की पारंपरिक ‘मोरुंग’ व्यवस्था को उन्होंने सामुदायिक शिक्षण एवं सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

अपने वक्तव्य में उन्होंने साहित्य, संस्कृति और परंपरा के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है, संस्कृति उसकी आत्मा है और परंपराएँ उसकी निरंतर प्रवाहित जीवनधारा हैं। उन्होंने वैश्वीकरण के इस दौर में सांस्कृतिक जड़ों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विकास और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं।

संगोष्ठी के दौरान देश-विदेश से आए विद्वानों ने अपने शोधपत्रों एवं विचारों के माध्यम से पूर्वोत्तर के आदिवासी समाज के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयामों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया। यह आयोजन ज्ञान-विनिमय, सांस्कृतिक संवाद और अकादमिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।

अपने पूर्वोत्तर प्रवास के दौरान डॉ. संजय ने कोहिमा में नागालैंड के माननीय राज्यपाल श्री नन्द किशोर यादव से शिष्टाचार भेंट भी की।

कार्यक्रम का समापन आपसी सहयोग, सांस्कृतिक संवर्धन और मानवता के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।


Share news