April 13, 2026

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चंडीमंदिर कमांड अस्पताल द्वारा वृद्धावस्था नर्सिंग पर अंतर-कमांड सतत नर्सिंग शिक्षा कार्यक्रम आयोजित

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नर्सिंग विशेषज्ञों ने वृद्ध आबादी के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता पर जोर दिया

जालंधर ब्रीज: भारत की वृद्ध आबादी की बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के उपायों पर विचार विमर्श करने के लिए, पश्चिमी कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर (सीएचडब्ल्यूसी) ने ‘वृद्धावस्था नर्सिंग अवधारणाएँ: चुनौतियाँ और अग्रिम मार्ग दर्शन’ पर एक अंतर-कमांड सतत नर्सिंग शिक्षा (सीएनई) कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम ने सेना में भविष्य में वृद्धावस्था नर्सिंग की रूपरेखा तैयार करने और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल में सार्थक योगदान के लिए नर्सिंग प्रोफैशनलस को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य नर्सिंग पेशेवरों को वृद्धावस्था उपचर्या की अनूठी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और सर्वोत्तम प्रथाओं से लैस करना था। इस कार्यक्रम में व्याख्यान, कौशल सत्र और पैनल चर्चाएँ शामिल थीं, जिसमें वृद्धावस्था नर्सिंग की मुख्य अवधारणाओं, वृद्धों की देखभाल की जटिलताओं और उनकी बेहतर संभाल के परिणामों के लिए नवीन समाधानों की खोज पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में जेरिएट्रिक नर्सिंग क्षेत्र के विख्यात विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए। जेरिएट्रिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. साजेश अशोकन ने “बेहतर वृद्धता : प्रौद्योगिकी और करुणा का एकीकरण” विषय पर मुख्य भाषण दिया, जिसमें समग्र वृद्धावस्था देखभाल के महत्व पर जोर दिया गया। पश्चिमी कमांड अस्पताल के कमांडेंट मेजर जनरल मैथ्यूज जैकब ने ” वृद्धावस्था निर्बलता और निवारण” पर बात की, जिसमें वृद्ध वयस्कों में कमजोरी की प्रारंभिक पहचान और प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कर्नल विवेक अग्रवाल ने “स्वस्थ वृद्धता”, स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को बढ़ावा देना, निवारक देखभाल और समय पर संभाल पर चर्चा की। लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित भास्कर ने “जेरिएट्रिक सिंड्रोम: रोकथाम, निदान और उपचार” पर अंतर्दृष्टि साझा की, जिसमें वृद्धावस्था रोगों के लक्षणों से निवारक प्रबंधन पर जोर दिया गया।

पैनल चर्चा के दौरान, मेजर एम आई कुरैशी ने “बुजुर्गों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और देखभाल करने वाले बर्नआउट सिंड्रोम” के बारे में अवगत कराया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की पहचान और समर्थन पर प्रकाश डाला गया। मेजर पल्लवी यादव ने “बुजुर्गों को सशक्त बनाने के लिए नर्सिंग रणनीति” पर चर्चा की, रोगी-केंद्रित देखभाल और उनके सशक्तिकरण को बल दिया। कैप्टन कीर्ति गोला ने “बुजुर्गों के लिए नर्सिंग वातावरण के समर्थन” पर बात की, जिसमें इष्टतम स्वास्थ्य परिणामों के लिए सहायक वातावरण बनाने पर जोर दिया गया। ब्रिगेडियर वंदना अग्निहोत्री ने “उपशामक और सहायक देखभाल” पर एक पैनल चर्चा का संचालन किया, जिसमें देखभाल परिणामों में सुधार के लिए सामयिक व नवीन रणनीतियों की खोज की गई।

प्रमुख जराचिकित्सा विषयों पर केंद्रित एक प्री-इवेंट पोस्टर प्रतियोगिता भी कारवाई गई, जिसमें विभिन्न संस्थानों से 50 ई-पोस्टर और 13 सामान्य पोस्टर प्रस्तुत किए गए। विजेता पोस्टर कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किए गए, जिसमें वृद्धावस्था देखभाल में अभिनव विचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को मान्यता दी गई।

कार्यक्रम में सेना मुख्यालय के वरिष्ठ नर्सिंग विशेषज्ञ, स्थानीय नर्सिंग संस्थानों के प्रतिनिधि, सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी कमांडों के नर्सिंग अधिकारी, साथ ही नर्सिंग छात्र और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हुए। कार्यक्रम में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख अस्पतालों में स्थानीय पीजीआईएमईआर, सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तथा चंडीगढ़ के निजी नर्सिंग संस्थान भी शामिल थे।


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