फोटो– डॉ. विक्रम सिंह
जालंधर ब्रीज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस धरती पर विकसित भारत का जो ख्वाब स्वयं देखा और समस्त देशवासियों को दिखाया, आज उसी धरती जैसा विकास का रंग पूरे भारत की सरज़मीं पर नज़र आ रहा है। हमारी पीढ़ी बड़ी खुशकिस्मत है, जो विकसित भारत के ख्वाब को बड़ी तेज़ी से साकार होते हुए अपनी आँखों से देख रही है। विकसित भारत का एक खूबसूरत उदाहरण है, ‘गुजरात’।गुजरात की धरती सिर्फ़ उद्योग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, परिवहन, पर्यटक, डेयरी आदि क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास का ही नाम नहीं है, बल्कि इस विकास की गति में इस राज्य ने अपनी विरासत और संस्कारों का दामन कसकर थामे रखा है। वास्तव में, यही इसके विकास की कुंजी है।
गुजरात वह धरती है, जहाँ के लोग पुरुषों के नाम के पीछे ‘भाई’ और महिलाओं के नाम के पीछे ‘बहन’ कहकर बुलाते हैं। आत्मीयता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि यहाँ के लोग देश के माननीय प्रधानमंत्री का नाम भी जब बोलते हैं तो वे श्री नरेंद्र ‘भाई’ मोदी जी कहते हैं।गुजरात सपनों को दृढ़ हौसला देने वाला राज्य है। यह राज्य इस बात का गवाह है कि जो ख्वाब व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर लोक हित के लिए देखे जाते हैं, वे निश्चित रूप से साकार होते हैं। इसका एक उदाहरण गुजरात के एकता नगर का ‘स्टैचू ऑफ़ यूनिटी’ है। यह सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 182 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस प्रतिमा पर सरदार पटेल जी द्वारा पहनी गई जैकेट के दूसरे और तीसरे बटन के बीच बनी जगह में खड़े होकर जब कोई व्यक्ति बाहर की ओर देखता है, तो पहली नजर में उसे सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का सपना साकार होता हुआ दिखाई देता है। यह सपना ‘सरदार सरोवर बांध’ का था।
सरदार पटेल जी के इस बांध के सपने को साकार होने में भले ही दशक लग गए, लेकिन उनकी दूरदृष्टि आज केवल ‘गुजरात की जीवन-रेखा’ ही नहीं है, बल्कि इस बांध का कई पड़ोसी राज्यों को भी फायदा हो रहा है।सरदार सरोवर बांध का पानी गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में लगभग 18 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई प्रदान करता है। यह हजारों गांवों और कई शहरी केंद्रों को पीने योग्य पानी की आपूर्ति करता है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 1,450 मेगावाट है, जो गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में समान रूप से साझा की जाती है।इस इलाके का विकास सरदार सरोवर बांध के स्वप्न के साकार होने पर ही नहीं रुका, बल्कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा की तरह निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है।
“विकास से आगे विकास” की सोच के कारण इस इलाके के आस-पास के जंगल में मंगल का अनुभव हो रहा है। सरदार सरोवर बांध के निकट स्टैचू ऑफ़ यूनिटी सहित कई पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो इस इलाके को पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं। इस क्षेत्र में लगभग 375 एकड़ में फैला सरदार पटेल जूलॉजिकल पार्क, फूलों की घाटी, आरोग्य वन, मियावाकी वन, कैक्टस गार्डन और एकता क्रूज़ जैसी करीब 27 से अधिक मनोहारी पर्यटन स्थल हैं, जो यहां पर्यटकों को दो-तीन दिन ठहरने के लिए विवश कर देती हैं। गुजरात का यह इलाका महिला सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
इन पर्यटन स्थलों में केवल स्थानीय निवासियों को ही रोज़गार दिया गया है। यहां जो ऑटो चालक हैं, वे केवल महिलाएं ही हैं। वास्तव में, एकता नगर जल संरक्षण, प्रकृति प्रेम और अनेकता में एकता की तस्वीर है।एकता नगर से लगभग 200 किलोमीटर दूर अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अपने आप में विकसित परिवहन प्रणाली की एक झलक प्रस्तुत करती है। लगभग 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना विकसित भारत की उस तस्वीर का प्रतिबिंब है, जहां आने वाले कुछ वर्षों में ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।
अहमदाबाद में इस परियोजना के स्टेशन अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किए जा रहे हैं, जहां यात्रियों को एक ही स्थान पर मेट्रो, रेलगाड़ी और बुलेट ट्रेन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।निस्संदेह गुजरात का विकास बुलेट ट्रेन की गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही यह राज्य अपनी 4500 साल पुरानी विरासत को भी संभाल रहा है। अहमदाबाद से सिर्फ 80 किलोमीटर की दूरी पर, यहाँ ‘लोथल हड़प्पाकालीन बंदरगाह नगर’ के दर्शन होते हैं। यह बंदरगाह एक नदी के तट पर बनाया गया था, जो समुद्र से जुड़ती थी, जिससे व्यापार और परिवहन सुगम हो जाता था।
यहां लगातार चल रही खुदाई से पता चलता है कि बंदरगाह की बनावट अत्यंत सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक थी, जिसमें पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए निकास मार्ग बनाए गए थे। इस बंदरगाह के माध्यम से हड़प्पावासी समुद्री व्यापार करते थे, जिससे वे दूसरे क्षेत्रों के संपर्क में रहते थे। यह स्थान प्राचीन भारतीय इतिहास में व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास का प्रतीक है।इस स्थान से कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर परियोजना द्रुत गति से प्रगति कर रही है। इस परियोजना का विकास केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
इस परिसर के केंद्र में एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय तैयार हो रहा है, जिसमें 14 विषय-आधारित दीर्घाएं बनाई जा रही हैं। इन दीर्घाओं में विभिन्न प्रभावशाली तरीकों से भारत की समुद्री ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। एक बार पूर्ण हो जाने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय होगा, जिसे देखकर दर्शकों की आँखें निसंदेह खुली की खुली रह जाएँगी।गुजरात के विकास की रफ़्तार यहीं धीमी नहीं पड़ती, बल्कि यह राज्य विज्ञान के कुछ क्षेत्रों में केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अग्रणी है। गांधीनगर स्थित ‘नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी’ इसका एक उदाहरण है, जो विश्व की पहली और एकमात्र फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी है।
यह फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण का कार्य कर रही है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि यह फॉरेंसिक साइंस क्षेत्र में केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में विभिन्न प्रयोगशालाएं स्थापित करने या अपग्रेड करने में विशेषज्ञ सलाह प्रदान करती है। इसमें स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं देश में होने वाले अपराध को रोकने और अपराध की छानबीन करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं।विज्ञान के अलावा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी गुजरात का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एस. ए. सी.) – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के केंद्र की अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। यह केंद्र मुख्य रूप से संचार उपग्रहों और रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के लिए उपकरण विकसित करता है।
संचार उपग्रह टेलीविजन प्रसारण, टेलीफोन सेवाओं, इंटरनेट और आपदा प्रबंधन जैसी सेवाओं को सक्षम बनाते हैं। रिमोट सेंसिंग उपग्रहों से प्राप्त चित्र और डेटा कृषि, जल संसाधनों, वन संरक्षण, शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी में उपयोग किए जाते हैं।यदि गुजरात के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे विकास की बात की जाए तो वर्ष 1966 में राष्ट्र को समर्पित गुजरात के वडोदरा स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) रिफाइनरी, न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को बढ़ावा दे रही है। वडोदरा के पास दुमाड़ में एक एक्रिलिक ऑक्सो अल्कोहल प्लांट स्थापित है, जो ब्यूटाइल एक्रिलेट और एन-ब्यूटेनॉल जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन करता है।
यह प्लांट उच्च-मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए रिफाइनरी उप-उत्पाद प्रोपीलीन का उपयोग करता है, जिससे पेंट, कोटिंग, गोंद और कपड़े के उपयोग के लिए आयात पर देश की निर्भरता कम होती है। यह पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।ऊर्जा के बाद यदि डेयरी उत्पादन की बात की जाए तो यहां आणंद की ‘अमूल डेयरी’ का नाम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। अमूल का जन्म 1946 में हुआ, जब स्थानीय किसानों ने अपने दूध की बेहतर कीमतें प्राप्त करने के लिए एक सहकारी संस्था बनाने का फैसला किया था। इस मॉडल ने भारत में श्वेत क्रांति लाई।
आज यह महासंघ लगभग 36 लाख किसानों से सालाना लगभग 11 अरब लीटर दूध खरीदती है। आणंद डेयरी की विशाल प्रसंस्करण क्षमता ही इसे दुनिया की सबसे बड़ी डेयरियों में से एक बनाती है, जिसकी कुल दैनिक प्रसंस्करण क्षमता लगभग 5 करोड़ लीटर है, जो इसे दुनिया भर के शीर्ष दैनिक दूध संसाधकों में से एक बनाती है। आणंद यूनियन से 1,278 ग्राम सहकारी समितियों के माध्यम से लगभग 8 लाख किसान जुड़े हुए हैं।गुजरात के इतनी तेजी से हो रहे विकास को देखकर मन में यह सवाल भी आता होगा कि विकास की इस गति में प्रकृति के साथ यहां जरूर अन्याय हो रहा होगा। लेकिन ऐसा नहीं है।
यहां सरकार ने हर साल 10 लाख से अधिक पेड़ लगाने के लक्ष्य के साथ विकास को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ाया है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात देश के अग्रणी राज्यों में से एक है, जो इस क्षेत्र में भारत के कुल उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत योगदान देता है।वास्तव में गुजरात, भारत का वह राज्य है, जो विकसित भारत के स्वप्न को वास्तविकता का रंग दे रहा है। गुजरात की यह प्रगति रातोंरात नहीं हुई है, इसमें सरकार के साथ-साथ यहां के लोगों की कड़ी मेहनत और देश के प्रति उनका समर्पण भी इसमें शामिल है।
गुजरात देश को यह संदेश भी देता है कि सरकार के साथ-साथ देश के नागरिकों को भी अपना अपेक्षित योगदान देना होगा ताकि विकसित भारत के निर्माण की गति और बढ़ सके।
डॉ. विक्रम सिंह(लेखक भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी हैं।)

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