March 29, 2026

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आप सरकार की पोल खोल: पंजाब में सुशासन नहीं, अव्यवस्था की चार्जशीट – भाजपा

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जालंधर ब्रीज: भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेश महामंत्री राकेश राठौर ने आज आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ एक विस्तृत चार्जशीट जारी की, जिसमें पंजाब की बिगड़ती स्थिति और सरकार की नाकामियों को विस्तार से उजागर किया गया है।

राठौर ने कहा कि यह दस्तावेज़ पंजाब की जमीनी हकीकत को सामने लाता है, जहाँ हर वर्ग आप सरकार की विफल शासन व्यवस्था से पीड़ित है। उनके साथ जिला भाजपा अध्यक्ष सुशील शर्मा, पूर्व विधायक जगबीर बराड़, जिला महासचिव अशोक सरीन, अमरजीत सिंह गोल्डी, पूर्व जिला अध्यक्ष रमन पब्बी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खेल प्रकोष्ठ सनी शर्मा,जिला सचिव अमित भाटिया,मौजूद थे।

  1. झूठ के पहाड़ पर खड़ी AAP: वादों में शून्य पूरा
    महिलाओं को ₹1000, मोहल्ला क्लिनिक, कर्मचारियों का नियमितीकरण और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन—आप सरकार ने किसी भी बड़े वादे को पूरा नहीं किया गया।
  2. किसान–विरोधी फैसले और पंजाब के अन्नदाता से छल
    लैंड-पूलिंग से लेकर सभी फसलों पर एम.एस.पी. न देने तक, भगवंत मान सरकार ने किसानों के हितों पर लगातार चोट पहुंचाई है।
  3. अनियंत्रित कर्ज़ और वित्तीय कुप्रबंधन
    पंजाब पर प्रति व्यक्ति कर्ज़ ₹1,23,274 पहुँच चुका है और कुल कर्ज़ 3.82 लाख करोड़ को पार कर गया है, जो अगले वर्ष 4.17 लाख करोड़ तक पहुँचने की आशंका है—यह वित्तीय दिवालियापन का स्पष्ट संकेत है।
  4. कानून-व्यवस्था का पतन: पंजाब बना ‘गैंगलैंड’
    RPG हमलों, ग्रेनेड हमलों, खुलेआम फायरिंग और दिनदहाड़े हत्याएँ आम हो गई हैं। पुलिस थाने तक सुरक्षित नहीं बचे।
  5. नशा तस्करी पर हावी AAP नेता, युवाओं की मौतें बढ़ीं
    हज़ारों युवा ड्रग ओवरडोज़ से मारे गए, जबकि कई AAP नेताओं पर नशा कारोबार से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं।
  6. सिख भावनाओं पर चोट और बढ़ते जन-आंदोलन
    अनेक बेअदबी मामलों में कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षक, डॉक्टर, मनरेगा मज़दूर और कर्मचारी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, पर सरकार बेपरवाह है।
  7. स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा
    विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, अस्पतालों में उपकरणों का अभाव, स्कूलों में हज़ारों पद खाली—AAP की कथित क्रांतियाँ खोखली साबित हुई हैं।

राठौर ने कहा: “पंजाब को ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए—न कि झूठे दावे, कुप्रबंधन और प्रचार की राजनीति।”


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