जालंधर ब्रीज: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को देश के महान हॉकी खिलाड़ी पद्म श्री बलबीर सिंह सीनियर (97) के देहांत पर गहरा दुख प्रकट किया, जिन्होंने आज प्रात:काल मोहाली के निजी अस्पताल में आखिरी साँस ली। हॉकी का यह महान खिलाड़ी अपने पीछे तीन पुत्र और एक बेटी छोड़ गया है। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने हॉकी खेल को बलबीर सिंह सीनियर द्वारा दिए गए योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय खेल जगत उनकी इस देन को भुला नहीं सकता। वह भारतीय हॉकी के सबसे बड़े खिलाड़ी और प्रशिक्षक के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओलम्पिक्स तक देश का नाम रौशन किया। बलबीर सिंह सीनियर ने बतौर खिलाड़ी तीन बार ओलम्पिक खेल में स्वर्ण पदक जीते और बतौर प्रशिक्षक भारत को 1975 में विश्व कप जिताया है। उन्होंने कहा कि इस महान खिलाड़ी के चले जाने से भारतीय खेल ख़ासकर हॉकी को न पूरा होने वाला घाटा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने उनके परिवार, सगे संबंधियों और लाखों खेल प्रेमियों के साथ दुख साझा करते हुए दिवंगत आत्मा की आत्मिक शान्ति के लिए प्रार्थना की और पीछे परिवार और स्नेहियों को ईश्वरीय आदेश मानने का बल प्रदान करने की प्रार्थना की। बलबीर सिंह सीनियर ने 1948 में लंदन, 1952 में हैलसिंकी और 1956 में मेलबर्न में ओलम्पिक खेल में स्वर्ण पदक जीते थे। 1952 के ओलम्पिक खेल के फ़ाईनल में बलबीर सिंह के पाँच गोल करने का विश्व रिकॉर्ड अभी तक नहीं टूटा।
1956 में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान और भारतीय खेल दल के झंडाबरदार थे। 1975 में उन्होंने अपनी कोचिंग अधीन भारत को एकमात्र विश्व कप जिताया था। बलबीर सिंह सीनियर को भारत सरकार ने पद्म श्री और पंजाब सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया। अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक कमेटी ने उनको ओलम्पिक आईकोनिक खिलाड़ी के तौर पर सम्मानित किया। यह सम्मान हासिल करने वाले वह अकेले एशियन पुरुष खिलाड़ी थे।

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