जालंधर ब्रीज: पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल से आग्रह किया कि वे आम आदमी पार्टी (आप) के स्थानीय नेताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में भेजने से पहले शालीनता सिखाएं।
उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ हफ्तों में हुई घटनाओं से ऐसा लगता है कि आप नेता, विधायक और कैबिनेट मंत्री सत्ता के नशे में चूर हो गए हैं और खुद को सर्वशक्तिमान समझते हैं। आम जनता, अधिकारियों और पत्रकारों के प्रति उनका पूरी तरह से अनियंत्रित और अपरिष्कृत व्यवहार दर्शाता है कि उन्हें विनम्रता के एक सबक की सख्त जरूरत है। पंजाब के मुख्यमंत्री को उन उपदेशों को अमल में लाना चाहिए जो वह चुनावों से पहले दिया करते थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाजवा ने कहा कि एक सोशल मीडिया चैनल पर साक्षात्कार में एक पत्रकार ने बाघापुराना से आप विधायक अमृतपाल सिंह सुखानंद पर गंभीर आरोप लगाए। एक स्थानीय पत्रकार ने आरोप लगाया कि विधायक ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया और अपने पीए के साथ मिल कर उनके साथ हाथापाई की और उन्हें अपमानित किया। इस पत्रकार का एकमात्र दोष बाघापुराना विधायक द्वारा की गई कथित अनियमितताओं को उजागर करना था।
कल चंडीगढ़ यातायात पुलिस के कर्मी ने जैतू से आप विधायक अमोलक सिंह पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लगभग दो हफ्ते पहले, चमकौर साहिब से आप विधायक डॉ. चरणजीत सिंह ने बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकारी सहायता के बारे में सवाल करने पर एक बाढ़ पीड़ित को झूठी प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी दी थी।
विपक्षी नेता ने कहा कि रोपड़ से आप विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा अधिकारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किए जाने के बाद पंजाब राजस्व अधिकारी संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। एसोसिएशन आप विधायक से माफी की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘आप विधायक और कुलदीप सिंह धालीवाल सहित कैबिनेट मंत्री स्कूलों और डिस्पेंसरियों में औचक छापे मार रहे हैं और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। कर्मचारियों ने दावा किया है कि वे आवश्यक मानकों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं।
बाजवा ने कहा कि उनका उतावलापन और अनुचित व्यवहार दर्शाता है कि विधायकों और मंत्रियों को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है कि वे जन प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधि जनता के मालिक नहीं हैं और जनता उनकी प्रजा नहीं है।

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