जालंधर ब्रीज:(नई दिल्ली) मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर राज्य के किसानों के खिलाफ कथित रूप से गंभीर आरोप लगाए हैं। ये समाचार रिपोर्ट भ्रामक हैं और पंजाब के चार संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में विगत दो वर्षों की अवधि में उभरने वाली सामाजिक-आर्थिक समस्या के बारे में एक साधारण अवलोकन की विकृत और अतिसंपादकीय राय प्रस्तुत करते हैं, जिसे संबंधित सीएपीएफ द्वारा इस मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया है।
पहले तो इस मंत्रालय द्वारा किसी विशेष राज्य या राज्यों को जारी किए गए पत्र के लिए कोई प्रयोजन नहीं बताया जा सकता है क्योंकि यह कानून और व्यवस्था के मुद्दों पर नियमित संचार का हिस्सा है। सभी राज्यों में एक संवेदनशील अभ्यास करने के अनुरोध के साथ यह पत्र केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को भी भेजा गया है, जिसका उद्देश्य कमजोर पीड़ितों का शोषण करने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसना है।
दूसरे, पत्र के बारे में कुछ तथ्यों की पूरी तरह से असंबंधित संदर्भ से तुलना की गई है ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि गृह मंत्रालय ने पंजाब के किसानों के खिलाफ “गंभीर आरोप” लगाए हैं और इसे वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन से भी जोड़ा गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से और केवल यह कहा गया है कि “मानव तस्करी सिंडिकेट्स” द्वारा मजदूरों को किराए पर लिया जाता है और अधिक श्रम को निकालने के लिए ड्रग्स के लालच द्वारा उनके “शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य” को प्रभावित करने के साथ- साथ उनके साथ “अमानवीय व्यवहार किया जाता है”।
गृह मंत्रालय ने तेजी से बढती इस समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से “इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए उपयुक्त उपाय करने” का केवल अनुरोध किया है।

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