October 13, 2026

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गुलज़ार से झोटा तक: नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल, बाजवा ने ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को घेरा

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जालंधर ब्रीज: पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मानसा में नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी सरकार के बहुचर्चित ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बाजवा ने कहा कि इस घटना को पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों से जुड़े अन्य चिंताजनक मामलों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

सितंबर में संगरूर के गुलज़ार सिंह की कथित तौर पर ज़हर खाने से मौत हो गई थी। उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से चिट्टे की उपलब्धता और अपने बेटे की नशे की लत को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें धमकाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के आरोप सामने आए। पुलिस ने सरपंच और अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा संबंधित आरोपों में मामला दर्ज किया था।

इसके कुछ दिन बाद जगसीर सिंह, जिन्हें जग्गा के नाम से भी जाना जाता है, ने कथित तौर पर संगरूर के जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर ज़हर खा लिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि नशे के मुद्दे को उठाने के कारण उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दी गईं तथा उन पर हमला किया गया। इन आरोपों की जांच की स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की संगरूर रैली के दौरान सरकार की नशे के खिलाफ कार्रवाई पर विरोध जताने के बाद मोहंजीत सिंह को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। राम गोपाल, हरभगवान सिंह, जसवीर सिंह और मोहिंदर सिंह से जुड़े पहले के मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

बाजवा ने कहा, “जब नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की मौत, धमकियों और प्रताड़ना से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो सरकार को जवाब देना चाहिए कि ऐसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। केवल अभियान चलाने और प्रचार करने से नशे की समस्या समाप्त नहीं होगी। इसके लिए ठोस कार्रवाई, जवाबदेही और प्रभावी पुलिस व्यवस्था आवश्यक है।”

उन्होंने झोटा की हत्या की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने, दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने तथा नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं को प्रभावी सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।

बाजवा ने इस घटना को धार्मिक रंग देने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने के किसी भी प्रयास के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे ऐसे विभाजनकारी एजेंडों के बहकावे में न आएं और राज्य की शांति, भाईचारे तथा सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखें।

उन्होंने कहा, “पंजाब की लड़ाई नशे, अपराध और भय के माहौल के खिलाफ है, किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं। हमें एकजुट होकर नशे के कारोबार को समाप्त करने और अपने युवाओं का भविष्य बचाने के लिए काम करना होगा। पंजाब को नारे और फोटो खिंचवाने की कवायद नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ एक ईमानदार, प्रभावी और निरंतर अभियान चाहिए।”


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