September 10, 2026

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सिंगापुर ठगी मामले में लंबे समय से फरार आरोपी अमेरिका से भारत लाया गया

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दिल्ली एयरपोर्ट पर CBI अधिकारियों ने किया गिरफ्तार, 2013 से था फरार

जालंधर ब्रीज: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सिंगापुर ठगी मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। आरोपी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी था। अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद हरनेक सिंह को 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही CBI अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया।

CBI के अनुसार, आरोपी को जल्द से जल्द हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI मामले) की अदालत में पेश किया जाएगा।

CBI दिल्ली ने इस मामले में वर्ष 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 में सिंगापुर में रहने या काम करने वाले भारतीय नागरिकों को भारत से संचालित साइबर ठगों ने फर्जी फोन कॉल किए थे। ठग खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन विभाग के अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे कि उन्होंने एयरपोर्ट पर डिसबार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी दी है और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तथा निर्वासन की कार्रवाई हो सकती है।

इसके बाद पीड़ितों को कथित समझौता शुल्क या जुर्माने के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के माध्यम से भारत में मौजूद निर्धारित लोगों को पैसे भेजने के लिए मजबूर किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम हरनेक सिंह द्वारा संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से प्राप्त की जाती थी। इस काम में उसके साथ सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन भी जुड़े हुए थे।

CBI के मुताबिक, हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध रूप से अमेरिका पहुंच गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक फरार रहा।

हरनेक सिंह के फरार रहने के दौरान मामले में सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और 26 मई 2025 को पंचकूला स्थित संबंधित अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया।

अमेरिका में हरनेक सिंह को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए समन और जमानती वारंट अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से तामील कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, CBI, पंचकूला की अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी का खुला गैर-जमानती वारंट जारी किया।

इसके बाद CBI ने इंटरपोल के माध्यम से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई, जिसके परिणामस्वरूप उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ। साथ ही उसके पासपोर्ट के संबंध में लुक-आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कराया गया।

CBI ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन और राजनयिक माध्यमों के जरिए फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एजेंसी ने इंटरपोल तंत्र, लुक-आउट सर्कुलर और विदेशी अधिकारियों के साथ समन्वय का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से फरार आरोपी को भारत वापस लाया है। CBI ने दोहराया कि कितना भी समय बीत जाए, फरार आरोपियों को कानून के सामने लाने के प्रयास जारी रहेंगे।


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