जालंधर ब्रीज: नाभा विधानसभा क्षेत्र के गांव ककराला में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान दलित वर्ग के दो युवाओं के साथ कथित तौर पर पुलिस द्वारा की गई बेरहमी से मारपीट, नग्न करके करंट लगाने के आरोपों ने पंजाब की ‘आप’ सरकार के कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने गांव ककराला पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनका दुख साझा किया। कैंथ ने पीड़ित युवाओं को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव स्तर पर आवाज बुलंद की जाएगी।
पीड़ित एस.सी. युवा संदीप सिंह और रजंत सिंह राजी ने कैंथ को बताया कि वे राजमिस्त्री का काम करते हैं और गांव में बघेल सिंह के घर पर काम कर रहे थे। उनके अनुसार, रात के समय घर में चोरी होने के बाद उन पर चोरी का आरोप लगाकर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पुलिस चौकी छींटांवाला के इंचार्ज और अन्य पुलिस कर्मचारियों ने उनकी बात सुने बिना उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और कथित तौर पर उन्हें नग्न करके करंट लगाया गया। उन्होंने बताया कि मारपीट और कथित यातना के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
कैंथ ने कहा कि पंजाब में कानून का राज होना चाहिए, पुलिस राज नहीं। यदि पीड़ित युवाओं द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल दो युवाओं के साथ हुई कथित ज्यादती का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार लोगों को सुशासन और बदलाव के बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी, लेकिन यदि आम नागरिक को पुलिस के पास अपनी सुरक्षा के बजाय यातना का डर महसूस हो तो सरकार के सभी दावे खोखले साबित होते हैं।
भाजपा नेता कैंथ ने पंजाब सरकार और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मांग की कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। पीड़ित युवाओं का मेडिकल करवाया जाए, उनके बयान निष्पक्ष तरीके से दर्ज किए जाएं और यदि कोई पुलिस कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति के साथ मारपीट या यातना के आरोपों को दबाने अथवा दोषी अधिकारियों को बचाने की कोई भी कोशिश हुई तो भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाएगा।
कैंथ ने कहा कि न्याय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा—यही इस मामले में भाजपा की स्पष्ट मांग है।
इस मौके पर पीड़ित परिवार के साथ दुख साझा करने के लिए भगवंत सिंह रामगढ़िया, सरबजीत सिंह बांसल, जसप्रीत सिंह, जगी मिस्त्री, धीरा सिंह, गुरदेव सिंह, संजू सिंह, बग्गड़ सिंह, दविंदर सिंह, नाजर सिंह और कृपाल सिंह (काका ठेकेदार) भी विशेष रूप से पहुंचे।

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