February 10, 2026

Jalandhar Breeze

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5 दिवसीय “औषधीय रसायन में फ्लोरीनीकरण के रहस्यों की समझ” की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन

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जालंधर ब्रीज: नाईपर, एस.ए.एस. नगर ने ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (GIAN) कार्यक्रम के अगले चरण की शुरुआत 03 से 07 नवम्बर, 2025 तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला “औषधीय रसायन में फ्लोरीनीकरण के रहस्यों की समझ” के उद्घाटन के साथ की। यह कोर्स प्रो. रयान ए. ऑल्टमैन, पर्ड्यू विश्वविद्यालय, अमेरिका द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो एक प्रख्यात औषधीय रसायनज्ञ हैं तथा ऑर्गेनोफ्लोरीन केमिस्ट्री, ऑर्गेनोमैटलिक कटैलिसीस और स्माल मॉलिक्यूल ड्रग डिजाईन में अपने अग्रणी योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं।

पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. दीपक बी. सालुंके और डॉ. मधुरी तानाजी पाटिल (एम.सी.एम. डी.ए.वी. कॉलेज, चंडीगढ़) ने विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया तथा जीआईएएन कार्यक्रम की शैक्षणिक दृष्टि और उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की।कार्यक्रम में प्रो. गंगा राम चौधरी, विभागाध्यक्ष, रसायन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, मुख्य अतिथि के रूप में तथा प्रो. गुर्जसप्रीत सिंह, स्थानीय समन्वयक, जीआईएएन, पंजाब विश्वविद्यालय, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. इंदर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष, प्राकृतिक उत्पाद विभाग एवं एसोसिएट डीन (पूर्व छात्र एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों), नाईपर, एस.ए.एस. नगर, ने आयोजकों की सराहना की जिन्होंने वैश्विक विशेषज्ञता और युवा वैज्ञानिक मस्तिष्कों को एक मंच पर लाने का उत्कृष्ट प्रयास किया। उन्होंने जीआईएएन कार्यक्रम की भूमिका पर बल दिया, जो अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को सक्षम बनाता है और अनुसंधान संस्कृति को सशक्त करता है। प्रो. सिंह ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे कठोर अनुसंधान, नवाचार एवं सार्थक सहयोग के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान को विभिन्न विषयों में आगे बढ़ाएं तथा वैश्विक अनुसंधान समुदाय में महत्वपूर्ण योगदान दें।

डॉ. दीपक बी. सालुंके और डॉ. मधुरी तानाजी पाटिल ने पाठ्यक्रम की सामग्री पर प्रकाश डाला। इस कार्यशाला में स्नातक (बी.एससी.), स्नातकोत्तर (एम.एससी., एम.फार्मा), पीएच.डी. छात्र, संकाय सदस्य, शोधकर्ता तथा अकादमिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित पेशेवरों सहित विविध प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो इस कार्यक्रम की व्यापक प्रासंगिकता और अंतःविषय स्वरूप को रेखांकित करता है।


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