August 31, 2025

Jalandhar Breeze

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राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की

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जालंधर ब्रीज: बाढ़ से पंजाब में हुई बड़े पैमाने पर तबाही को देखते हुए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। साथ ही, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में हुई बारिश ने भी स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

उन्होंने पत्र में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि पंजाब के लगभग 500 गाँव, 300 सरकारी स्कूल और 3 लाख किसानों की फसल बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। 26 अगस्त की रात को रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी का बहाव था, जबकि 1988 में रावी में यह 11.20 लाख क्यूसेक पानी था। संत सीचेवाल ने कहा कि ब्यास दरया में भी इस बार 2.5 से 3 लाख क्यूसेक तक पानी बह चुका है। उन्होंने पत्र में बताया कि मौजूदा पानी का बहाव पंजाब में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुका है।

संत सीचेवाल ने पत्र में कहा कि ब्यास दरया के पानी ने किसानों की हज़ारों एकड़ फसल तबाह कर दी है। इस समय पंजाब के माझा, मालवा और दोआबा — तीनों क्षेत्र बुरी तरह बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरन तारन, कपूरथला, फिरोज़पुर और फाजिल्का ज़िले भयंकर बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे हैं।

उन्होंने पत्र में लिखा कि देश और विशेषकर पंजाब के किसानों ने हमेशा ही अनाज की दृष्टि से देश के अन्न भंडार भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पंजाब के किसान और जवान हमेशा देशहित में लड़ते और खड़े होते आए हैं।

राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल ने इस पत्र की प्रति पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान को भी भेजते हुए मांग की है कि वे मजबूती से केंद्र सरकार के समक्ष पंजाब का पक्ष रखें। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि पंजाब सरकार की ओर से भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तथ्यों सहित बताया जाए कि किस प्रकार हिमाचल प्रदेश समेत अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का पानी पंजाब की नदियों में आकर भारी तबाही मचा रहा है। जिससे प्रभावित किसानों, मज़दूरों और अन्य पीड़ितों को सही और उचित मुआवज़ा मिल सके तथा इस मुआवज़े को बढ़ी हुई महंगाई के सूचकांक से जोड़कर इसमें वृद्धि की जाए।

बातचीत के दौरान संत सीचेवाल ने अपनी इस मांग को दोहराया कि मुआवज़ा सीधे किसानों को मिलना चाहिए।


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