
जालंधर ब्रीज: हाथों की सफाई को प्रोत्साहित करने और लोगों में कोविड -19 वायरस के संचार के खतरे को कम करने के लिए एनआईटी ने जालंधर की भारत हर्बल्स कंपनी के साथ मिल कर एक बहुत ही कम कीमत का हाथ साफ़ करने वाला सैनेटाइजर विकसित किया है जो स्वभाव से जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है अर्थात हर्बल है। इसमें 70 % से अधिक अल्कोहल का इस्तेमाल किया गया है और कोरोना वायरस को नष्ट करने में बहुत अधिक प्रभावशाली है।
डॉ. बी आर आंबेडकर नैशनल इंस्टीच्यूट आफ टेक्नालॉजी (एन आई टी) जालंधर के निदेशक डाक्टर ललित कुमार अवस्थी ने जालंधर के एस एस पी (देहात) नवजोत सिंह माहल को आज उनके कार्यालय में इस सैनेटाइजर की 100-100 एम एल की 216 बोतलें उपलब्ध कराईं । इसी मात्रा में सैनेटाइजर सी आर पी एफ और बी एस ऍफ़ को भी उपलब्ध कराये जा चुके हैं।
बी एस एफ से श्री टी एल डोगरा और सी आर पी एफ से श्री कुलवंत सिंह और संस्थान की तरफ से प्रोफेसर आर के गर्ग, प्रोफेसर अनीष सचदेवा, प्रोफेसर एस के सिन्हा, डॉक्टर एस के मिश्रा, डॉक्टर रोहित मेहरा, डॉक्टर एस बाजपाई, डॉक्टर सोनिया चावला और प्रोफेसर बी इस सैनी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सी आर पी एफ जालंधर के डी आई जी श्री हरजिंदर सिंह की तरफ से श्री कुलवंत सिंह तथा बी एस ऍफ़ के सहायक कमांडेंट कुलदीप शर्मा की और से श्री टी एल डोगरा ने श्री कुलवंत सिंह ने एन आई टी जालंधर द्वारा इस महामारी के दौरान सुरक्षा बलों का ख्याल रखने के लिए दिए गए इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। भारत सरकारके प्रसारण मंत्रालय के आउटरीच ब्यूरो के जालंधर यूनिट ने दोनों ही अर्द्ध सैनिक बलों के साथ तालमेल करके डॉ. बी आर अंबेडकर नैशनल इंस्टीच्यूट आफ टेक्नालॉजी के माध्यम से उन्हें हैंड सैनेटाइजर उपलब्ध कराया। फील्ड पब्लिसिटी अधिकारी राजेश बाली ने कहा कि एन आई टी का यह प्रयास बहुत ही सामयिक है और सुरक्षा बलों केसाथ साथ अन्य लोगों की भी संकट की इस घड़ी में सहायता करेगा।
डॉ. ललित कुमार ने बताया कि इंस्टीचयूट ने टी ई क्यू आई पी के अंतर्गत अपने अध्यापन स्टाफ से अभी हाल ही में कोविड -19 से संबंधित अनुसंधान एवं विकास प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं। अध्यापको द्वारा प्रस्तुत किये गए प्रोजेक्टों की स्क्रीनिंग के बाद संस्थान के निदेशक द्वारा 17 लाख रुपये की लागत के कुल 12 प्रोजेक्ट मंजूर किये गए हैं।
प्रोजेक्ट में सस्ती कीमत की योजक निर्माण सामग्री एल ई डी के साथ आफिस फ़ाइल के लिए अल्ट्रा वायलट एक्सपोजर बॉक्स का इस्तेमाल करते हुए कोविड मेडिकल प्रोटेक्टिव फेस शील्ड विकसित की गई है। मानव के लिए सनेटाइजिंग केप्सूल , अपने आप को ठीक रखने अर्थात सेल्फ हीलिंग के लिए अल्कोहल आधारित सैनेटाइजर सिल्वर नैनो एंटी वायरल फिल्मों को प्राकृतिक विकल्प के रूप में इस शील्ड को विकसित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। फलों, सब्जियों और डिब्बा बंद चीजों से सस्ती कीमत का सैनेटाइजर विकसित करने, सस्ते हर्बल हैंड सैनेटाइजर के विकास, कार व्हील सेनेटाइजेशन सिस्टम के विकास, अस्पतालों के लिए सर्विस रोबोट और बेहतर फेस मास्क तथा पी पी ई किट के विकास प्रोजेक्ट एन आई टी के प्रोजेक्टों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्टों को टी ई क्यू आई पी- III विश्व बैंक प्रोजेक्ट द्वारा फंड दिया जाएगा और 31 अगस्त 2020 तक यह प्रोजेक्ट पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अध्यापकों द्वारा जल्दी से प्रोजेक्ट लिखने और कोविड की महामारी के विरुद्ध देश की जनता द्वारा लड़ी जा रही जंग में उनकी सहायता के लिए ए किये गए प्रयासों के लिए उनकी सराहना की।

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